मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

दंगा अभियान गीत -'कदम कदम बढाए जा'



कदम कदम बढाए जा, यूँ आग तू लगाये जा
ये मुल्क गैर मुल्क है तू मुल्क को जलाये जा .

जले अमन, लुटे वतन, नसीब हो नहीं कफ़न
पकड़ के एक एक को करो क़त्ल, करो दहन
ना आबरू बचे कहीं, ना जिंदगी रहे कहीं
नरक अगर बने कहीं, बने यहीं, बने यहीं .


हयात दुश्वार हो, कदम कदम मिले क़ज़ा
कदम कदम बढाए जा यूँ आग तू लगाये जा................|

कसम तुझे गरूर की, कसम तुझे हजूर की
ये आग नफरतों की है, जलेगी ये जरूर ही
ये आग हर जगह लगा तू भाग भाग के लगा
तू आत्मा, न आदमी, नहीं कोई तेरा सगा

ना दिल ही दिल में बिलबिला धरा पे जलजला उठा
कदम कदम बढाए जा यूँ आग तू लगाये जा...........|


तू मार दे या मर मिटे,भले ही तेरा सर कटे
मगर किसी की आह सुन न तू रुके, न तू हटे
मरा जो तेरे हाथ से, जो तेरे हाथ से जला
वो सारे दुःख से दूर हो धरा से स्वर्ग को चला

बहादुरों सा नाम कर , ना कायरों सा तू लजा .
कदम कदम बढाए जा यूँ आग तू लगाये जा...........|


                              
                         
  

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