गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

घेरे में अन्ना





      एक तरफ से पुलिस कमिशनर घेरे है और दूसरी ओर से फ़ौज का जनरल और आप फिर भी यही चाहते हैं कि अन्ना अपनी मर्जी से चलें ?अब भाई माना वो रिटायर्ड अफसर हैं लेकिन इतना रुआब तो रिटायरमेंट के बाद भी रहता है कि अपने अफसर को मातहत सम्मान दें. कई बार वो लोग भी जो सर्विस के दौरान अफसर के आदेशों की उपेक्षा करने के लिए बदनाम होते हैं अपने रिटायर्ड अफसर की इच्छा को आदेश मानकर पालन करने को तत्पर पाये गए हैं. अन्ना को इस मानवोचित स्वभाव से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए. उनमें महात्मायी रंग भरने की केजरीवाल की कौशिश अब उनके ही आड़े आ गयी है. लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए कि अन्ना कोई महात्मा गांधी नहीं है.गाँधी की शिक्षा दीक्षा अन्ना से बड़ी थी. यह अंतर अन्ना की सोच और व्यवहार में देखा जा सकता है. यह फर्क अन्ना द्वारा गोपाल राय को दुत्कारे जाने से बिलकुल ही स्पष्ट हो गया है. बहरहाल अन्ना और केजरीवाल केजरीवाल तो फिर भी ईमानदार और सिद्धांत के पक्के मालूम होते हैं लेकिन उन लोगों का क्या भरोसा किया जाए जो उनकी छाया  में खड़े होकर बड़े होना चाहते हैं? इनमें से ऐसे कई ऐसे नामचीन लोग हैं जो जिनके व्यवहार से तानाशाही प्रवृत्ति स्पष्ट परिलक्षित होती है. ऐसे अलोकतांत्रिक हवाई नेताओं को जनता जितनी शीघ्र पहचान लेगी हमारे जनतंत्र के लिए उतना ही अच्छा होगा .

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