रविवार, 19 जनवरी 2014

कमल' के न 'हाथ' के, हम हैं साथ 'आप' के .


      अब केजरीवाल  धरने पर बैठेंगे. उनकी जिद है कि मंत्री का कहा न मानने वाले पुलिस के अधिकारियों को जांच होने तक  निलम्बित किया जाए. ये तो अजीब जिद है कि एक अधिकारी को सिर्फ इसलिए निलम्बित किया जाए क्योंकि वह मंत्री जी को मर्यादित व्यवहार के लिए कहता है . अरे आप नेता हैं मंत्री हैं सरकार हैं  तो इसका ये तो मतलब नहीं है कि आप मनमानी करेंगे ? और सरकारी अधिकारी बेजुबान हैं, नियम कायदों से बंधें हैं तो उन्हें सरेआम बेइज्जत करेंगे ? अगर उन्होंने अपने  कर्त्तव्य  का पालन  नहीं किया है तो पूरे प्रकरण  जांच की जायेगी और अगर वो दोषी पाये गए तो उनके खिलाफ उचित कार्यवाही होगी .अगर दोषी पाये जाने पर भी  कार्यवाही न हो तो आप धरना देना, अपने कार्यकर्ताओं को हजूम इकठ्ठा करने के लिए कहना अभी से इस धरने का क्या मतलब है ? अगर वो अधिकारी भी आप के गैर वाजिब हस्तक्षेप के लिए आपके विरुद्ध कार्यवाही को लेकर धरने पर बैठ जाएँ या हड़ताल पर चले जाएँ तो सरकार का क्या होगा ? क्या उनका कोई सामाजिक सम्मान नहीं है जो आप उन्हें यूँ ही निलम्बित करा देना चाहते हैं ? वो भी तब जब आरोपी
नाईजीरियाई लड़कियाँ दोषी नहीं पायी गयी हैं .क्या आप उन विदेशी महिलाओं का अपमान  कर भारत का सर सारे  संसार में नीचा  करने का काम नहीं कर रहें  हैं ? उस पर भी आपकी जिद है कि आपके मन मुताबिक़ कार्यवाही हो .उचित तो यह था कि सम्बंधित मंत्री को पुलिस पर नाजायज दबाव डालने और विदेशी महिलाओं को अपमानित करने के के लिए तुरंत बर्खास्त किया जाता लेकिन आपने ऐसा नहीं किया .आप सोचते हैं कि आप धरने पर बैठ जायेंगे तो जनता आपको सर पर बिठा लेगी ? लेकिन जनता इस झांसे में आने वाली नहीं है. आपने न्याय का मार्ग अपनाने की जगह अराजकता और मनमानी की राह चुनी  है .आप इससे  पहले भी अपने मंत्री के बचाव में माननीय न्यायालय के विरुद्ध अनावश्यक अपमान जनक टिपण्णी कर चुके हैं. आपकी इन करतूतों  के लिए आपकी सरकार को तुरंत बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए लेकिन केंद्र सरकार आसन्न चुनाव के कारण और जनता आपके अनुभवहीन होने के कारण अगर आपको अभी कुछ नहीं कह रही है तो इसका ये मतलब नहीं है कि आपको ऐसा करने का जनादेश मिला है .आप मर्यादा में रहकर जनसेवा करेगें तो लोग आपके साथ जुड़ेंगे नहीं तो गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश से जो अंधड़ बढ़ा आ रहा है लोग अपनी पगड़ी बचाने के लिए चुपचाप उसके आगे सर झुका देंगे और देखना आपकी टोपी हवा में उड़ जायेगी. आप के वो सारे ख्वाब  हसीं  ख्वाब  जो आपने कांग्रेस  का विकल्प  बनाने  के देखें  हैं ख्वाब  ही रहेंगे  हकीकत  नहीं बनेगे  व्यवस्था   बदलने  की बात  तो खैर   आप रहने  ही दें  जो आदमी  अपनी हाथों  की लकीरों  से बंधा  है वो व्यवस्था  नहीं बदल  सकता  है .व्यवस्था  परिवर्तन करने वालों का आत्मविश्वाश इतना कमजोर नहीं होता है . आपने कहा अधिकारी सुधार जाएँ लेकिन हम कहते हैं आप भी सुधारें रहें, बिगड़े नहीं, देश की जनता आपकी और आशा भरी निगाहों से तक रही है .अगर आपने उसे धोखा दिया तो जनता आपको माफ़ नहीं करेगी.

                                                                                          -------------अमर नाथ मधुर 

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें