गुरुवार, 23 जनवरी 2014

आप का हीरो नहीं 'नीरो'

                                                  दरवाजे से अंदर गए हम, लौट भी आये
                                                    मनचले "खिड़की" का पता पूछ रहे है

                                                     
   ज्यादातर लोगों का मानना है कि केजरीवाल का धरना अनावश्यक था और असफल भी है .केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने तो उन्हें पागल तक कह दिया है.लेकिन मैं समझता हूँ अरविन्द केजरीवाल न तो पागल हैं और न ही उनका धरना असफल है.  इस घटना से एक दो बातें स्पष्ट हो गयीं हैं. सबसे पहले तो यह है कि उन्होंने जनता को यह  भली भाँति समझा दिया है कि वो कांग्रेस से मिले नहीं है उससे उनकी वैचारिक दूरी बरकरार है. अत: भाजपा जो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी कि मिलीभगत  का आरोप लगाती रहती है वो पूरी तरह झूठा है.  एक ऐसी पार्टी जिसे पहले ही दुष्प्रचार  में माहिर माना जाता है इस तरह बेनकाब होने से बुरी तरह बौखला गयी है .यह बौखलाहट टी वी चैनल पर उनके प्रवक्ताओं में साफ़ देखी जा सकती है. एक तरफ नौसीखिया आम आदमी प्रवक्ता जहां पूरी सौम्यता के साथ अपना पक्ष रखते हैं वहीँ दूसरी और भाजपा प्रवक्ता हमेशा बाँहें चढ़ाये दिखते हैं. आखिर दिखे भी क्यूँ नहीं ? उन्हें सबसे ज्यादा सीटें मिली और फिर भी वो सरकार बनाने में नाकामियाब रहे.उस पर तुर्रा ये कि उन्हें विपक्ष का काम भी नहीं करने दिया जा रहा है .ये काम भी आप आदमी पार्टी ने स्वयं संभाल लिया है. अब वो करें तो क्या करें ? इसलिए उनकी बौखलाहट समझी जा सकती है .

लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि यही सच्चा लोकतंत्र है जो आम आदमी पार्टी कर रही है. वो ये साबित करने में सफल हुयें हैं  कि वो सत्तारूढ़ होकर बदल नहीं गए हैं जैसा कि होता आया है बल्कि अब भी जनता के हित में सडकों पर उतरने का दमख़म  रखते हैं.उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से जिसके अधीन दिल्ली पुलिस है कथित दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध समुचित कार्यवाही की मांग रखी जब वो मांग नहीं मानी गयी तो वो धरने पर बैठ गए.इससे उन्होंने ये साबित किया कि वो पहली सरकारों की तरह केंद्र सरकार से दिल्ली  पुलिस को उनके अधीन करने की मांग करके हाथ पर हाथ धरकर  बैठ नहीं जायेंगे  बल्कि उसके लिए जन संघर्ष भी करेंगे. इससे दिल्ली को पूर्ण राज्य की मांग को भी सैद्धांतिक आधार और बल मिल गया है .यद्यपि इस पर विवाद की गुंजायश है कि दिल्ली पूर्ण राज्य होना चाहिए या नहीं. लेकिन केजरीवाल तो अपनी मांग दृढ़ता पूर्वक रखने में कामियाब हो ही गए हैं .इसी के साथ अब वो कांग्रेस और भाजपा को भी बेनकाब करने में कामियाब हो गए जो दिल्ली की जनता से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा  दिलाये जाने का वायदा करते रहते हैं लेकिन अब खुलकर उसके खिलाफ बोल रहे हैं.
 अब थोड़ी बात उन तात्कालिक घटनाओं की करें जिनके कारण केजरीवाल के धरने की नौबत आयी है. दिल्ली के क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती ने नाईजीरियाई युवतियों की गिरप्तारी को लेकर पुलिस पर दबाव डाला. उनका कहना था कि ये विदेशी यहाँ नशीले पदार्थों और देह का व्यापार करते हैं.उनका  ये भी कहना था कि दिल्ली  पुलिस का इन्हें  सरंक्षण  प्राप्त है इसलिए वो रंगें हाथों उन्हें पकड़वाने के लिए स्वयं मौके पर गए लेकिन एस एच ओ ने उनके कहने के बाद भी उन विदेशी युवतियों को जो देह व्यापार में लिप्त थी और नशे में थी गिरप्तार  नहीं किया. उन्होंने स्वयं अपने लोगों के साथ उन्हें जाकर मौके पर पकड़ा तब भी गिरप्तार नहीं किया. इस दौरान उनकी एस एच ओ से तीखी झड़प हुई. एस एच ने उन्हें मर्यादा में रहकर व्यवहार करने के लिए कहा और कहा कि जो उन्हें सही लगेगा वे वही करेंगे, आप उच्छाधिकरियों से बात कीजिये, मुझसे दुर्व्यहार न करें. क़ानून मंत्री सोमनाथ भाटी ने  इसकी शिकायत मुख्यमंत्री  केजरीवाल से की जिन्होंने गृहमंत्रालय को कार्यवाही के लिए लिखा जो नहीं की गयी.  यूँ पुलिस के खिलाफ राखी बिड़ला की भी शिकायत थी कि पुलिस ने बहु हत्यारों को गिरप्तार नहीं किया .इसी के साथ डेनिस महिला के साथ बलात्कार के  मामले को भी धरने से जोड़ दिया गया लेकिन ये सब कहने की बातें हैं .असल बात दिल्ली सरकार के मंत्री और सरकार के इकबाल  को कायम करने की थी जिसके लिए अरविन्द केजरीवाल ने धरने के जरिये पूरा जोर लगा दिया.                  
         गौर तलब है कि इस मामलें में आगे शायद कोई कार्यवाही नहीं होती क्यूंकि दिल्ली पुलिस ने अपने अधिकारियों को रिपोर्ट करने के अलावा कुछ नहीं किया था लेकिन जिन नाईजीरियाई युवतियों के साथ अभद्रता क़ी गयी वे अपनी शिकायत लेकर कोर्ट में चली गयीं [बताया जाता है कि उन्हें सरेआम मारापीटा गया और जबरन सबके सामने उन्हें स्व मूत्र का नमूना देने के लिए मजबूर किया गया ताकि उनके नशे में होने कि मेडिकल जांच करायी जा सके ] और कोर्ट ने सोमनाथ भारती के खिलाफ आरोप दर्ज  करने के आदेश  दे  दिए .     अब पूरे प्रकरण की जांच क़ी जा रही है. केजरीवाल का मान रखने के लिए आरोपी पुलिस अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है. लेकिन सोमनाथ भारती शान से मंत्री बने हुए हैं. अब उनके खिलाफ महिला आयोग ने भी नोटिस दे दिया है. लोग माँग कर रहें हैं कि सोमनाथ भारती को बर्खास्त किया जाए. सोमनाथ भारती मफ़लर में मुँह छुपाये घूम रहे हैं. लेकिन वो कैसे बचेंगे ? वो नहीं जानते कि उन्होंने मुँह छुपाने की जगह तो केजरीवाल के लिए भी नहीं छोड़ी है .केजरीवाल पहले ही उनके पक्ष में न्याय पालिका की अनुचित आलोचना को लेकर सवालों के घेरे में हैं.अब विदेशी श्यामवर्णी अफ्रीकाकन महिलाओं के साथ नस्लीय भेदभाव और उत्पीड़न  के जो आरोप उन पर हैं उनका स्पष्टीकरण देने की बजाये वो बेहयाई से  मुस्काराते हुए जनतंत्र  मुँह चिढ़ा रहें हैं जो केजरीवाल की अगुआवाई में चल रहें व्य्वस्था परिपर्तन के जनांदोलन की भावना के बिल्कुल खिलाफ है.
अव्वल  तो अब तक  स्वयं केजरीवाल को ही उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए था लेकिन अच्छा यह होता कि जब पुलिस अधिकारियों को जांच होने तक छुट्टी पर भेजे जाने की घोषणा की गयी गयी थी वे तभी  स्वयं अपना इस्तीफ़ा ये लिखकर भेज देते कि क्यूंकि वे भी इस प्रकरण से जुड़ें हैं इसलिए न्यायिक जाँच होने तक वे वे मंत्री पद से अलग  रहेंगें ताकि जाँच निष्पक्ष हो सके. उनके ऐसा करने से उनकी विश्वशनीयता बढती और और केजरीवाल को मजबूती के साथ साथ एक गरिमा और गम्भीरता  प्राप्त होती जिसका आज अभाव हो गया दिखता है. विपक्षी की बोलती भी बंद हो जाती और कांग्रेस को पलटी मारने का मौका भी नहीं मिलता. यह भी संज्ञान में रखना चाहिए कि नाईजीरियाई युवतियों के नशे में होने की पुष्टि नहीं हुई है.इसी के साथ मिडिया में यह  भी खबरें आयी हैं कि सोमनाथ भारती का जो उन नाईजीरियाई विदेशियों के पड़ौस  में रहते हैं    रात भर होने वाले शौर को लेकर पहले से ही झगड़ा है और मंत्री बनते ही सोमनाथ भारती ने इसी खुन्नस में  यह ड्रामा किया है.वरना हजारों छोटी बड़ी जगह  हैं जहां ड्र्ग्स और देह का गैर कानूनी कारोबार चलता है. क्या मंत्री जी को वहाँ कोई कार्यवाही नहीं करनी चाहिए थी?
     सोमनाथ भारती में पद से चिपके रहने की वैसी ललक दिखायी देती है जैसा अन्य पार्टियों के नेताओं में मिलती  है.उनका अहंकार भी वैसा ही है जैसा मंत्री पद पाये नेताओं का होता है. फिर आम आदमी पार्टी अलग कैसे है ?
      ये सवाल ही आम आदमी पार्टी की छवि को धूमिल कर रहा है. उनके अभद्र बयानों की आलोचना सर्वत्र  हुई है .आम आदमी के प्रवक्ता योगेन्द्र यादव उनके व्यवहार से व्यथित हैं और सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कर चुके हैं .पार्टी में आज कोई भी उनके साथ नहीं है .इसलिए उन्हें अगर पार्टी से भी अलग न किया जाए तो कम से कम पद मुक्त करना तो बेहद जरूरी हो गया है. वरना भारतीय राजनीतिक जमीन पे तीसरे और सार्थक विकल्प की जो कोंपल  फूटी है वह असमय ही कुम्हला  जायेगी और जनता की आँखों में आशा की जो नयी चमक जगी है वो गहरी उदासी में बदल जायेगी .क्या केजरीवाल ऐसा चाहेंगे ?      
  खिड़की एक्सटेंशन में युगांडा की महिलाओं के साथ बदसुलूकी और नस्लीय टिप्पणी मामले में कानून मंत्री सोमनाथ भारती को दोबारा नोटिस भेजकर शुक्रवार को बुलाया गया था। लेकिन मंत्री जी को वहां जाना जरूरी नहीं लगा और पतंगबाजी के कार्यक्रम में पतंग उड़ाते रहे। दिल्ली महिला आयोग कार्यालय में भारती की तरफ से पहुंचे दो वकीलों को अध्यक्ष बरखा सिंह यह कह कर लौटा दिया कि आयोग में वकीलों को अनुमति नहीं है.....!!
 उधर मनचले खिड़की एक्सटेंशन का पता पूछ रहेंहैं जहां युगांडा की ये युवतियां ड्रग्स  और देह व्यापार करती हुयी बतायी जाती हैं.

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