मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

रैली है या तमाशा है ?


 दृश्य -1
 ये जहर किसमें भरा है ?ये जहर की खेती कौन कर रहा है? ये जहर कौन काट रहा है? ये जहर कौन बो रहा है ?
मेरठ की रैली में सामने बैठे लोगों से मोदी बसों में बाम चूरन बेचने वालों की तरह उंगली से इशारा कर कर के पूछ रहें हैं.
लोग हैं कि चिल्लाये जा रहें हैं मोदी मोदी मोदी .भाजपाई खुश हैं कि मोदी कितने लोकप्रिय हैं. सवाल क्या है ? जबाब क्या है ? ये साफ़ साफ़ सुनायी दे रहा है दिखायी दे रहा है. सिर्फ अंधों को नहीं दिखता है बहरे नहीं सुनते हैं.

दृश्य -२
       यू पी में दंगे हुए ?दंगें हुए, ठीक से हुए? बड़े दंगे हुए? भाईओं बहिनों हमने दंगे किये . नहीं किये? हमने दंगे किये .अब हम यू पी को दंगा मुक्त करेंगे .बोलो आप यू पी को दंगा मुक्त चाहते हो? यू पी में दंगा ना हो आप चाहते हो? आप चाहते हो ?आप चाहते हो ?आप चाहते? आप चाहते हो तो हमें वोट दो नहीं तो? नहीं तो हम वो करेगें जो हम यू पी में करते आयें हैं पटना में करके आये हैं पूरे देश में करते आयें हैं.
दृश्य -३
       भाईओं बहिनों मैंने दिखाया मेरे दोनों हाथ खाली हैं, उनमें कुछ नहीं है. आप देखिये उनमें कुछ नहीं है .कुछ नहीं है, कुछ नहीं है उधर पीछे खड़े जवान देखें कुछ नहीं है. अब मैं हवा से आपके लिए मिठाई लाऊंगा. आप मिठाई खायेंगे?आप खायेंगे?आप खायेंगे? बोलो हाँ खायँगे. बोलो जोर से बोलो. मैं आपको मिठाई खिलाऊंगा. आप अपने हाथ खोल लीजिये, अपने हाथ ऊपर करें ,ऊपर करें, पीछे वाले ऊपर करें, आगे वाले ऊपर करें अब सब ताली बजायेंगे. ताली बजायेंगें ना ?बजायेंगें ना ?जोर से बजायेंगें ना ? तो आप ताली बजाओ. बजाओ ताली, और जोर से बजाओ और जोरर से .एडम गडम गडम धड़म ये आ गयी मिठाई. मैं ये मिठाई खा लेता हूँ. क्या कहा ?मिठाई हमें दो, मिठाई हमें दो .नहीं भाई हम नेता हैं हलवाई नहीं. वो ताली बजवानी थी बज गयीं मजमा ज़माना था. जम गया.
पब्लिक परेशान हो जाती है ये तो मूर्ख बना रहा है.देना दिवाना कुछ नहीं खाली फेंक रहा है . फेकू कहीं का .चलो घर इसके चक्कर में कल से रोटी भी नसीब नहीं हुई.
पब्लिक घर लौट रही है . और मैं खड़ा खड़ा सोच रहा हूँ नेता है या मदारी? रैली है या तमाशा है ? बड़ा कन्फ्यूजन हो रिया है .समझने की कौशिश करता हूँ तो दिमाग चकराने लगता है. मैं भी घर चलूँ कहीं चक्कर न आ जाए .

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