मंगलवार, 11 मार्च 2014

साहब को हैरानी है


आंधी और बवंडर भी है तूफाँ और सुनामी है
जगह सुरक्षित नहीं कहीं है साहब को  हैरानी है. रामा हो रामा......४

कहते हैं सारे भारत में छायी काली रात  है 
साहब का सुशासन देखो मक रहा गुजरात है .
इतनी चकाचोंध कि लड़ने को एक जगह नहीं दिखती
बाहर जाकर मांग रहे पर मांगें भीख नहीं  मिलती .    

सारी जनता देख रही है, कितनी खींचातानी है .
जगह सुरक्षित कहाँ मिलेगी साहब को हैरानी है. रामा हो रामा......४


यूँ तो कई सयाने प्यादे आगे पीछे रहते हैं
खुद को विश्वाशी होने का दम भी भरते रहते हैं
लेकिन नहीं भरोसा कोई कब धोखा दे जायेगा
अपनी परंपरा को कैसे आगे नहीं बढ़ाएगा .


चिंता आठो याम यही है, बल खाती पेशानी है 
जगह सुरक्षित कहाँ मिलेगी साहब को  हैरानी है. रामा हो रामा......४
       

वो दंगों का प्रेत अलग से पीछा करता रहता है
मरने वालों की चीखों का उत्तर माँगा करता है .
जाने कैसा खून था उनका, नहीं धुलाए से धुलता 
कुर्ते रोज बदल लेता हूँ, फिर भी अलग चमकता है.


अब तो दिल्ली ही दागों को बस ढंग से धो सकती है
सुनते हैं दिल्ली में सबसे अच्छा साबुन पानी है .

जगह  सुरक्षित कहाँ मिलेगी साहब को हैरानी है. रामा हो रामा......४

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