रविवार, 16 मार्च 2014

मौसम चुनावों का

हमारे देश में आता है जब मौसम  चुनावों  का
परिन्दें सब  सियासी भाँपते हैं रुख हवाओं का
जिधर बहती हवा वो भी उधर उड़कर चले जाते
ठिकाना ढूँढ ही लेते सुरक्षित वो  गुफाओं का .
                                       ------------'मधुर'


हमारी दोस्ती बस इसलिए घबरायी रहती है 
तुम्हारे दिल में जो अब तक भी जोधाबाई रहती है. 
तुम्हारी आँख में है मीना ए बाजार की चाहत 
मैं कहता हूँ तुम्हारी उस तरफ भौजाई रहती है. 
                                                   --------मधुर



रोज पहले थोड़े थोड़े अपने पर काटे गए 
और फिर आकाश के टुकड़े हमें बांटे गए 
हुकुम था पहले तो आबो दाना पिंजरें में चुगें 
और फिर भरते  रहें   हर   रोज   फर्राटे नए  .
                                          --------मधुर

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