सोमवार, 17 मार्च 2014

क्या चकल्लस है

अमां गुजरात से दिल्ली तलक ये क्या चकल्लस है
जो दावेदार थे उनसे अभी छीना बनारस है .
अभी होने इलैक्शन दो, हमें लड़ने इलैक्शन दो
पुराने घाघ जितने हैं सभी की हाथ में नस है .

हमें मालूम है कैसे  ठिकाने वो लगाने हैं
ये माना दोस्त वो सब हैं सभी साथी पुराने हैं
मगर कुछ तो सियासी दांव हम भी सीखआयें हैं    
जो बरगद छांव देते हैं वही पहले गिराने हैं .

किसी बरगद के नीचे क्या कोई पौधा पनपता है
किसी का छत्र हटता है तभी तो सिर चमकता है
यही असली सियासत है इसे मानो न मानो तुम
जो सिर पर हाथ  है पहले वही तो हाथ  कटता है.

हमारे झूठ को क्यूँ लोग जाने सच समझते हैं 
हमारा काम बकना है सो हम दिन रात बकते हैं 
यहाँ बेकार ही सच मानने की मत करो जहमत 
जो सच्चे लोग हैं अब वो सियासत में न रहते हैं .

विकिलिस कुछ कहे या अब असांजे भी बताये सच
हमें हासिल जो करना था वो हासिल कर चुके ये रच 
यही सब आज तक कर के बढे  हैं  हम सियासत में 
तो फिर फेकू फरेबों से रहेगा दूर कैसे बच  ?


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