बुधवार, 2 अप्रैल 2014

चाय वाला



        वो एक  चाय की दूकान थी लेकिन सब लोग उसे भाजपा का चुनाव कार्यालय कहते थे.वहाँ  कोई भी राह चलता चाय पीने के लिए आकर बैठ जाता.  जब तक चाय पकती है वह बैठकर चाय वाले से गपशप करता है आजकल चुनाव का समय था तो ज्यादातर चुनाव की ही चर्चा होती रहती थी.राजनीतिक बातों में सबकी दिलचस्पी रहती ही है चाय वाला भी इस चर्चा में खूब जोरर शौर से हिस्सा लेता था. हर मसले पर वह अपनी निर्णायक राय रखता .वो समझता है कि उसकी समझ इतनी बड़ी है कि अगर वो देश का पी एम् बन जाए तो सारी समस्याएं चुटकियों में सुलझा देगा. चाय का कप खाली होने तक ग्राहक उसकी हाँ में हाँ मिलाता है फिर चाय का कप मेज पर पटक देता है. चाय वाले का दिल धड़कने लगता है कहीं कप टूट न जाए .अब उसका ध्यान कप के टूटने पर केंद्रित है देश के टूटने की बात उसे मामूली लगने लगती है. जब उसका ध्यान टूटता है तो वह देखता कि दूकान खाली है. केवल चाय के झूठे कपों पर मक्खियां भिनभिना रहीं हैं. मक्खियां जो वहाँ भिनभिनाती ही रहती हैं कभी कभी इतना तंग करती हैं कि उसका मन करता है इन्हें झाड़ू से मार दे. वैसे भी वह ज्यादातर खाली बैठा मक्खियां ही मारा करता है, लेकिन इधर चुनाव का मौसम है तो दूकान पर ग्राहक भी बढ़ गएँ हैं और मक्खियां भी ज्यादा भिनभिना रही हैं. उधर ग्राहकों की चें चें इधर मक्खियों की भिन भिन.चायवाले को दम मारने की फुरसत नहीं है.वो खुश है दूकान पर ऐसी रौनक कभी नहीं रही अबकी छप्पर जरूर टिन की छत में बदल जाएगा .  
   वो खुश है दूकान पर ऐसी रौनक कभी नहीं रही. ऐसा  ही  कारोबार  रहा  तो अबकी छप्पर जरूर टिन की छत में बदल जाएगा . यह सोचते सोचते उसे झपकी आ गयी. उसे दिन में ही सपना दिखायी देने लगा .उसने देखा की उसकी चाय की छोटी सी गुमटी एक बड़े रेस्तरां में बदल गयी है जो हर वक्त गाहकों से भरा रहता है .उसने कई लडके चाय पकड़ाने के लिए रख लिए हैं जो भाग भाग कर सबको चाय दे रहें हैं और वो थाले पर बैठा बैठा रुपये सम्हालने में व्यस्त है .रात के दस बज गएँ हैं लेकिन ग्राहकों की भीड़ कम नहीं हो रही है .तभी उसे लगा कि उसके ढाबे की छत पर पारियां छम छम कर रहीं हैं. वो मग्न होकर उनक नाच देख रहा है आह क्या खूबसूरत हैं क्या सुर ताल है मजा आ गया .तभी एक ग्राहक चिल्लाया अरे ओ चाय वाले तेरी टीन टपक  रही है  इसे ठीक कराओ. वो बोला क्या बात करते हो हजूर बारिश का यहाँ क्या काम ?
 अच्छा तो जरा यहाँ बैठ कर देख सारे कपडे खराब हो गए. लगता है तुझे दूकान नहीं चलानी है .
दूकान तो साहब ऐसी चलेगी जैसी किसी की न चली होगी.
अरे चाय भी बनाएगा या शेख चिल्ली की तरह ख्वाब ही देखता रहेगा ?
चाय ? चाय वाले ने हड़बड़ाकर आँखें खोली .देखा गुमटी में बैठा चाय चाय चिल्ला रहा है .वो उठा और चाय बनाने लगा .


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