शनिवार, 5 अप्रैल 2014

राष्ट्रहित में थप्पड़

देश को आजाद हुए सड़सठ साल हो गए.इस बीच बहुत परिवर्तन हुआ है जिसे सकारात्मक कहा जा सकता है . जैसे पहले उन जातियों के साथ छुआछूत का अमानवीय बर्ताव किया जाता था जो निम्न जाति कही जाती थी. ये जातियाँ आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक दृष्टि से बहुत पिछड़ी थी .स्वाभाविक रूप से इनका मनोबल भी कमजोर था. आजादी के बाद इन्हें सवैंधानिक सरक्षण मिला और सरकार ने इनके आर्थिक उत्थान के लिए भी कुछ प्रयत्न किये जिसका परिणाम ये हुआ है कि आज ये जातियाँ उच्च जातियों से हर स्तर  पर बराबरी से पेश आ रही हैं . हमारे बुजुर्ग बताते हैं कि पहले मेहतर दरवाजे पर झाड़ू लगाता था और उससे जरा भी चूक होती थी तो  चौधरी उसे जुतिया देते थे. आज मेहतर बेगारी में किसी के दरवाजे पर झाड़ू लगाने नहीं जाता है. वो पूरी मजदूरी लेकर ये काम करता है और अगर कोई जरा भी अभद्रता से पेश आता है तो उसे झाड़ू मारकर ठीक करने का साहस भी रखता है .
अब ये मानने को कोई तैयार नहीं है कि जो गन्दगी फैलाते हैं वो इज्जतदार हैं और जो गन्दगी साफ़ करता है वो नीच है,अछूत है . इसलिए आज अगर कोई अपनी सड़ी  गली मानसिकता से ग्रस्त होकर झाड़ू लेकर राजनीति की  गन्दगी साफ़ करने निकले लोगों को थप्पड़ घूँसे मारता है तो यकीन मानिये एक न एक दिन आम आदमी उस पर झाड़ू जरूर फेर देगा . और उनकी सारी हेकड़ी धरी की धरी रह जायेगी .
चोर कोई और है, भ्रष्ट कोई और है लेकिन चांटे आम आदमी को ही क्यूँ मारे जाते हैं ? क्या इसलिए कि वो सहज सुलभ है और उसे मारने में पलटवार का कोई खतरा नहीं है ? लेकिन मत भूलिये आम आदमी की सहन शक्ति की भी एक सीमा है ,उसकी चुप्पी को उसकी कमजोरी न समझा जाए.ये चुप्पी एक दिन जबर पर भारी पड़ेगी.
   राष्ट्रवादी पार्टी का मैनीफेस्टो पढने के लिए लोग बड़े बेताब हैं लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि पहले आम आदमी को घूसे थप्पड़ लगाने से फुरसत पा जाएँ तभी न मैनिफेस्टो जारी करने का काम करें. अभी राष्ट्रहित में थप्पड़ घूसे मारने का कार्य करना जरूरी है, मैनिफेस्टो चुनाव के बाद भी जारी किया जा सकता है. वैसे राष्ट्रहित में मैनीफेस्टो में एक बिंदु यह भी जोड़ने पर विचार हो रहा है कि कितने घूसे थप्पड़ खाकर आम आदमी को विशेष आदमी होने का हक़ दिया जाएगा? थोडा प्रयोग सफल हो जाए तो संख्या तय कर दी जायेगी .

लिखें घोषणा पत्र में कैसे हम ये बात ?
आम आदमी खायेगा थप्पड़, घूसे, लात. 

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