मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा

                                                   
   लो जी केजरीवाल को आज फिर थप्पड़  मार दिया. बेचारे को रोज कोई ना कोई थप्पड़ मार देता है. बेचारा अच्छा ख़ासा दिल्ली का मुख्यमंत्री था बेकार में इस्तीफ़ा दे दिया.सत्ता के गुलगुले गले में चुभ रहे थे ?अब खाये थप्पड़. लोगों का कहना है कि वो खुद अपने आदमियों को थप्पड़ मारने के लिए पैसे देता है. सुना लोगों आपने ? क्या आपको ऐसा कोई दूसरा राजनेता मिला जो मुख्यमंत्री  की गद्दी छोड़कर थप्पड़ खाता हो ? सयाने कहते हैं कि यह अपने लिए सहानुभूति जगाना चाहता है. इसलिए ये सब कर रहा है ताकि सहानुभति में आकर जनता वोट दे दे और ये चुनाव जीत जाए .
 अगर चुनाव जीतने का यही अचूक तरीका है तो सारे नेताओं को प्रोपेगेंडे का सारा खर्च बंद करके बस जनता को इतना इशारा कर देना चाहिए कि वो थप्पड़ खाना चाहते हैं. आप देखना उन्हें एक भी पैसा किसी को नहीं देना पड़ेगा उलटे लोग उन्हें पैसा देने को उमड़ पड़ेगें और उन नेताओं को एक दो नहीं बेहिसाब थप्पड़ जड़ेंगे. लो बना लो  चुनाव जीतने का विश्व रिकार्ड बना लें .यही नहीं उनके लग्गू भग्गुओं को भी बेहिसाब थप्पड़ मारेंगे. वो दे दना दन दे दनादन मचेगी कि थप्पड़ मारने वालों में पहले थप्पड़ मारने के लिए ही लात घूंसे चल जायेंगे और उन्हें कंट्रोल करने के लिए सेना बुलानी पड़ेगी .
कहा जा रहा है कि इन्होंने दिल्ली की जनता को धोखा दिया है इसलिए आम आदमी इनसे बहुत नाराज है और वही थप्पड़ मार रहें हैं .मीडिया में झूठ फैलाने में कौन लोग माहिर है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है. इसलिए ये तो कोई नहीं मानेगा कि अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को धोखा दिया है .जहां तक आम आदमी के अरविन्द से नाराज होने की बात है तो मैं ये पूछना चाहूंगा कि अरविन्द केजरीवाल ने ऐसा क्या गलत काम किया है जिसके लिए उसे थप्पड़ मारे जाने चाहियें ? सत्ता का त्याग गलत काम है या सत्ता से हर हाल में चिपके रहना ? अगर वो दिल्ली का मुख्यमंत्री होता तो क्या आप उसकी परछाई को भी छू सकते थे ? क्या आज तक आपने जिन नेताओं को चुना है उनहोंने आपके सब काम किये हैं ? क्या आपने उनमें से किसी नेता का हाथ पकड़कर उससे उसके काम का हिसाब माँगा है ? क्या नेता के गुर्गे के आँखे तरेर कर देखने मात्र से आपको पसीना नहीं छूटने लगता है ? क्या दूर बैठे नेता ने इशारों इशारों  में ही धमकी देकर आपकी जबान बंद नहीं करायी है ? क्या आपने बार बार उन्हीं नेताओं को नहीं चुना है जो बाहुबली हैं, माफिया हैं. नामी सफेदपोश गुंडें हैं ? आपने कभी अकेले या संगठित होकर उनके खिलाफ चूँ तक नहीं की है और एक सीधे सादे,जनता के हित में दिन रात लड़ने वाले,मुख्यमंत्री बनकर भी, सांस का मरीज होकर भी, तेज बुखार से पीड़ित होकर भी सबसे कड़ी सर्दी की रात में जनता के अधिकार के लिए सड़क  पर सोने वाले आम आदमी को थप्पड़ पे थप्पड़ मारे  हैं .आप सोचते हैं कि आप बड़े बहादुर हैं लेकिन मैं कहता हूँ आप सबसे बड़े कायर हैं ,भाड़े के टट्टू हैं जो अपनी गैरत को बेचकर गैर के लिए अपने भाई  के मुंह पर थप्पड़ मार रहें हैं ? धिक्कार है आपको . ये थप्पड़  अरविन्द केजरीवाल के मुंह पर नहीं है ये  लोकतंत्र  के मुंह पर तमाचा है. अरविन्द केजरीवाल जनतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनाव लड़ रहा है. जनता का काम जनतंत्र के पहरुओं को ताकत देना है  लेकिन जो लोग वोट की जगह साजिशों को हथियार बनाकर चुनाव जीतना चाहते हैं और जो उनके इन कुत्सित इरादों को पूरा करने का औजार बन रहें हैं वो सब लोकतंत्र के शत्रु हैं. उनके इस कुकृत्य के लिए उनकी नस्लें भी शर्मिंदा होंगी और उन्हें हमेशा लोकतंत्र के भक्षकों  में गिना  जाएगा .                 .

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