बुधवार, 14 मई 2014

इलाकाई कुत्ते और बाहरी कुत्ते

   एक संघी द्विराष्ट्रवादी ने फरमाया है कि 'असम में जो भी मुसलमान मारे गये हैं वो बांग्लादेशी कुत्ते थे'.
  हाँ जी  सही कहा  आपने   वे  कुत्ते ही  थे और इलाकाई  कुत्ते  अपने इलाके   में   बाहरी कुत्तों  को बिलकुल  बरदाश्त नहीं करते हैं . इंसानों  की बात दूसरी  है वो सब को  पनाह देते हैं .इसी लिए   कुत्ते  कुत्तों को काट रहें हैं .भँभोड़ रहें हैं. भों भों  कियां  कियां का शौर  मचा  है. अब समझदार आदमी  को चाहिए कि लाठी उठाये और दो चार कस के इन कुत्तों के जमा दे.इन कुत्तों को काबू में रखने का यही सही तरीका है . जो पागल  होकर  बेकाबू हों गये   हों उन्हें  तुरंत ही गोली  मार देनी चाहिए.
   एक और मित्र  ने कहा है कि आडवाणी भी तो पाकिस्तानी है उसे क्यों नहीं बाहर भेजा जाता ?
मैंने  कहा  भाई जी आडवाणी को पाकिस्तान  भेजने के लिए गिरिराज ने टिकट थमा दिया है लेकिन वो कह रहें हैं कन्फर्म टिकट नहीं चाहिए. मैं तो वेटिंग में रहता हूँ .पहले वेट  करूँगा ऐसे कैसे एकदम  चला जाऊं .    

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