बुधवार, 4 जून 2014

मैं हौसला ना हारा


पीने से अगर मिटते यूँ दर्द जमाने के
शीरी भी बहुत पीती, फरहाद बहुत पीता.

सच्चाई की जय होगी हारेगा झूठ एक दिन
रावण को पता होता ले जाता नहीं सीता .

भाई से लड़ाई में भाई का क़त्ल वाजिब
इसको भी धर्म कहकर समझाती रही गीता .

मैं लिख रहा हूँ कविता घरवाली भुनभुनाती
कुछ भी नहीं करेगा बैठा है नाशपीटा .

कुछ काम करो तुम भी सब लोग यही कहते
शायर न हवा खाता ,शायर न हवा पीता .

ए जिंदगी मुसलसल तुझसे है जंग मेरी
मैं हौसला ना हारा, माना न कभी जीता .

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