बुधवार, 16 जुलाई 2014

मेरा दीन तेरा दीन, फिलस्तीन फिलस्तीन


      इजरायली हमले में फिलस्तीनी बच्चों के मारे जाने की जो तस्वीरें आ रहीं हैं उन्हें देखकर दिल दहल जाता है. बच्चे मानवता का भविष्य हैं .उनका न कोई राष्ट्र होता है न नस्ल न धर्म न जाति. बड़े ही उन्हें सोच की सरहदों में कैद करते हैं बड़े ही उन्हें नफ़रत से देखते और मारते हैं .बच्चे न किसी से नफ़रत करते हैं न किसी को मारते हैं. एक बन्दूक उठाकर जाते हुए सैनिक, आतंकी और डाकू को भी बच्चे तितली भेंट में देकर या मुस्कराकर खुश कर सकते हैं. बच्चे ये नहीं देखते हैं कि बन्दूकधारी की जात क्या है उसका मजहब क्या है.फिलस्तीनी और इजरायली बच्चे एक साथ मिलकर खेल सकते हैं लेकिन उनके रहनुमा मिलकर नहीं रह सकते हैं. अगर कुछ दशकों तक ये बड़े बड़े लीडरान अपनी सोच को ताला लगा दें तो उनकी सोच से मुक्त जो पीढ़ी जवान होगी वो जरूर आपस में सदभाव से रहेगी .




सके 15 वर्षीय भाई के बाद एक इसराइल सैनिक के साथ बहस Ah'd Wa'ad उनके गांव में कब्जे के खिलाफ एक निहत्थे प्रदर्शन में भाग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.आहद तमीमी 'Handala साहस पुरस्कार' से सम्मानित किया गया. 



ये 17 साल का फलस्तीनी नौजवान अनस क़ांदील दो दिनपहले इसने अपने फेसबुक अकाऊंट पे लिखा:- 
"मै सो नही सकता,जब तुम मेरे घर मे हमला करने जा रहे हो"

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