शनिवार, 19 जुलाई 2014

इजराइल और भारत के राष्ट्रवादी


    भारत   में ऐसे लोगों की तादाद काफी है जो ये समझते  हैं कि हमारे देश  का हित इजराइल के साथ  रहने से है. पता   नहीं उन्हें   ये गलतफहमी    कैसे   है ? शायद   उनके   दिलो   दिमाग   पर   पाकिस्तान का भूत   सवार   रहता   है और वे   ये समझते   हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ   इजराइल हमारा   पक्का   साथी   है.शायद   इसलिए  कि इजराइल मुस्लिम  देश पाकिस्तान के साथ नहीं जाएगा. ऐसे लोग स्वयं को राष्ट्रवादी  कहते हैं. यही राष्ट्रवादी एक कदम आगे बढकर तब साम्प्रदायिक हो जाते हैं जब वे इजरायल द्वारा फिलस्तीनियों के मारे जाने पर खुश होते हैं ये ख़ुशी उनके अंदर मुस्लिमों के प्रति रची बसी नफ़रत को तुष्ट करती  है. दोनों ही स्थितियों    में  उनकी असुरक्षा की भावना प्रदर्शित होती है, जो निराधार है.  हमारे  हित  अहित  का सवाल   इतना   महत्वपूर्ण  नहीं  है जितना  महत्वपूर्ण  सबकी  स्वतन्त्रा  का सम्मान  करना  है. इजराइल  अपने  पड़ौसी  फिलस्तीन  को  बराबरी  का दर्जा  दे  दे  दोनों  देशों  का झगड़ा  ख़त्म  हो जाएगा. अगर इजराइल  को  अपने  नागरिकों  के लिए  ज्यादा  जमीन  की  जरुरत  है तो वो अपने  हमदर्द  अमेरिका  और  ब्रिटेन  से कहे  कि  वो  उसे  आस्ट्रेलिया  में  कुछ  जमीन एलाट  कर  दें. आस्ट्रेलिया  के पास  जमीन  ज्यादा  है और  जनसंख्या  कम  है . वैसे भी आस्ट्रेलिया कोई अंग्रेजों के बाप का थोड़े ही है,वो उन्होंने जबरदस्ती कब्ज़ा लिया है. वो तो  एशिया  वाले घोंचू थे जो अपने पड़ौस का इतना बड़ा भूखंड नहीं खोज पाये .अगर  जापान वाले ही खोज लेते तो आज जापान अमेरिका  से भी बड़ी महाशक्ति होता .भारत तो खैर पराधीन था इसलिए उस समय उससे ज्यादा उम्मीद की बात नहीं की जा सकती . लेकिन आज भारत के जो लोग इजराइल से हमदर्दी रखते हैं एक सवाल उनसे भी है कि क्या वो यहूदियों को अपने देश में बसने के लिए जगह देने को तैयार हैं ? इसका जबाब निचित ही हाँ नहीं ना  है.क्यूँकि वो बांग्लादेशियों को ही बर्दाश्त नहीं करते हैं जबकि  बांग्लादेशी  तो पूर्व  भारतीय  ही हैं और वे उनके अखंड  भारत की सीमा में भी आते हैं.निसंदेह यहूदियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है लेकिन उसके जिम्मेदार फिलस्तीनी  नहीं हैं. इसलिए फिलस्तीनियों के साथ होने वाले अन्याय का विरोध करना उतना ही जरूरी है जितना हिटलर द्वारा यहूदियों पर किये गए अत्याचार को कोसना है. मजे की बात ये है कि हिटलर के अनुगामी ही आज यहूदियों के हिमायती बन रहें हैं. वो एक बार ये भी तो कहें कि आर्य नस्ल की श्रेष्ठता का दंभ भरने वाला हिटलर गलत था क्यूँकि उसने यहूदियों का संहार किया  था .

                          फेसबुक  चर्चा
Like ·  · Promote · 
  • Amitabh Shukla bharat humesha se israel ke khilaf tatha arab desho ka dost raha,,1948 main india ne voting se bahar rahne ka faisla kiya tha UN main...akhir sirael kya karega,,jidher se missile aya wo udher missile dag dega
  • पीयूष त्रिवेदी · 4 mutual friends
    Buddhists living with Hindus = No ProblemHindus living with Christians = No ProblemChristians living with Shintos = No ProblemShintos living with Confucians = NoProblemConfusians living with Baha'is = NoProblemBaha'is living with Jews = No ProblemJews living with Atheists = No ProblemAtheists living with Buddhists = NoProblemBuddhists living with Sikhs = No ProblemSikhs live living Hindus = No ProblemHindus live living Baha'is = No ProblemBaha'is live living Christians = No ProblemChristians living with Jews = No ProblemJews living with Buddhists = No ProblemBuddhists living with Shintos = No ProblemShintos living with Atheists = No ProblemAtheists living with Confucians = NoProblemConfusians living with Hindus = No ProblemMuslims living with Hindus = ProblemMuslims living with Buddhists = ProblemMuslims living with Christians = ProblemMuslims living with Jews = ProblemMuslims living with Sikhs = ProblemMuslims living with Baha'is = ProblemMuslims living with Shintos = ProblemMuslims living with Atheists = ProblemMuslims living with Muslims = Problem
  • रावत दिनेश सिंह चौहान · Friends with Yogesh Patel Bjp
    इजराइल ने फिलिस्तीनियों से नही बल्कि हमास से दिक्कत है ।अगर उसे फिलिस्तीनियों से दिक्कत होती तो वो उनके लिए राहत सामग्री नही भेजता । उन्हें दूसरी जगह जाने के लिए नही बोलता। हमास जो इजराइल पर हमले कर रहा वो आपको नही दीखता तब क्या आपकी आँखों को मोतियाबिंद हो जाता है ।
  • Shoaib Salman Israel kisi ka dost nai h wo sirf or sirf gaddari karna janta h agar aaj india k kuch log usko apna dost samajhtey h to ek baat pakka h Israel ko chance laga to wo india ko bhi lat mar dega or gaddari ka asli rang dikha dega. ..
  • Shoaib Khan Gazi jis trha israil ka hr nagrik military me hai...usi hr flasteeni ka rishta hamas se hai....
  • Shoaib Khan Gazi in yahoodiyo ko musalmano se zyada koi nahi janta...mere hindu awain hi khush ho rahe hai .... wo ye nahi jante k ye koum cancer jese felti hai.... agar esa hota to hitlar inka qatle aam kbhi na krta
  • Nadeem Akhter Ye marne wale masum bachche hamas ke atankwadi he,
    Kya soch he, 
    Apni nafrat ki tasalli chahe jese kar lo
  • Suryakant Surwase http://m.thehindu.com/.../israel.../article4804424.ece/...
    m.thehindu.com
    The claim was made by the Israeli liberal newspaper “Haaretz” citing a report of...See More
  • Suryakant Surwase https://www.middleeastmonitor.com/.../11458-israeli-gas...

    www.middleeastmonitor.com
    The Egyptian government has been asked by economic experts to approve gas imports from Israel in order to fulfil the needs of the local market. The experts demanded that issues of politics and economics be separated, specifically as Egypt used to export ga
  • Vikas Asati A++.....................
  • Dhruva Singh इजरायल से मित्रता भारत की सामरिक जरूरत है
  • अमरनाथ 'मधुर' फिलिस्तीन की आजादी तीसरी दुनिया के देशों की आजादी की जमानत है .
  • Charlie Pareek कमाल की बात है ना इजराइल के पडोसी देश इतने आंसू नहीं बहा रहे जितने दस्त इन्हें लग रहे है
    सीरिया में जून महीने में 2600 लोग मारे गए उनके लिए तो कभी नहीं लिखा
    और ईराक बर्मा उक्रेन में मरने वालों की बात करो तो कहते हो अंदरूनी मामला है 
    पर जब palestine और इजराइल की बात होती है तो रुदालियों की तरह फुट फुट कर रोने लगते हो

    ये घडियाली आंसू कभी अपने देश में गैरों की तरह रह रहे काश्मीरी पंडितों के बारे में गिरे नहीं

    वैसे मुलायम सिंह को पूजने वाले से झूठे सेकुलरिज्म की ही उम्मीद की जा सकती है
  • श्यामसुंदर बी. मौर्या दुनिया के सभी सभी देशों से जोरदार विरोध शुरू हो चुका है..मगर हमारी ये जाहिल सरकार,[मोदी] चुप हैं.
  • Charlie Pareek आप जैसों को तो मौका चाहिए लोकसभा चुनाव की हार के घाव सहलाने का
    क्यों आपकी बोलती बंद है बाकी देशों में हो रहे कत्ले आम पर
    मौकापरस्त छद्म सेकुलर
    दिखाओ कहाँ सऊदी अरब टर्की रूस दुबई ने किया विरोध
    महाराज इन्टरनेट और जानकारी आपको ही नहीं है अंधे बहरे नहीं बैठे है
    हजारों की मौत ईराक और सीरीया में दिखती नहीं है
    मधुर सर कभी डाली प्रोफाइल में सीरिया में हत्या रोकने की फोटो या ईराक में होने वाली हत्या के खिलाफ फोटो
    आप भी अपने नेताजी की तरह तुष्टिकरण कर रोटी सकने वाले है
    धिक्कार है ऐसे दोगले घटिया रवैये पर
  • श्यामसुंदर बी. मौर्या और जो जवानो के कटे सर लानेवाले थे,जीत गये हैं चुनाव मे वो,,नवाज शरीफ और हाफिज़ सईद की बिर्यानी खा-खिला रहें हैं..गर्व करो ऐसे दोगुले रवय्ये पर.
  • श्यामसुंदर बी. मौर्या एक गाँव में एक काना था सब लोग उसे एक आँख होने की वजह से काणा कह कर चिढाते थे।
    उसने सोचा की इन गाँव वालो को सबक सिखाता हूँ। उसने रात को 12 बजे अपनी दूसरी आँख भी फोड़ ली और पुरे गाँव में चिल्लाता हुआ दोड़ने लगा "मुझे भगवान दिखाओ दे रहें है अच्छे दिन दिखाई दे रहे है",ये सुनकर गाँव वाले बोले अबे काणे तुझे कहाँ से भगवान या अच्छे दिन दिखाई दे रहें हैं। तो उसने कहा की रात को सपने में भगवन यानि अच्छे दिनों ने दर्शन दिया और बोले की अगर तू अपनी दुसरी आँख भी फोड़ ले तो अच्छे दिन दिखाई देंगे। इतना सुनकर गाँव के सरपंच ने कहा की मुझे अच्छे दिन देखने हैं। तो अँधा बोला की दोनों आँखे फोडोगे तभी दिखाई देंगे अच्छे दिन। सरपंच ने हिम्मत करके अपनी दोनों आँखे फोड़ ली। पर ये क्या अच्छे दिन तो दूर अब तो उसे दुनिया दिखाई देना बंद हो गई। उसने अंधे से कान में कहा की अच्छे दिन तो दिखाई नहीं दे रहे। तो अँधा बोला सरपंच जी सबके सामने ये सच मत बोलना नहीं तो सब आप को मुर्ख कहेंगे इसलिए बोलो अच्छे दिन आ गए। इतना सुनकर सरपंच ने जोर से बोला मुझे भी अच्छे दिन दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद एक एक करके पुरे गांव वालों ने अपनी आँखे फोड़ डाली और मज़बूरी में वाही बोल रहे थे जो सरपंच ने कहा । अच्छे दिन आ गये। यही हाल अच्छे दिन के समर्थको का है। आँखे तो फोड़ ली हैं अपने हाथों से अब तो मज़बूरी में बोलना ही पड़ेगा अच्छे दिन आ गए।
  • श्यामसुंदर बी. मौर्या ये नीच नकारा कायर दुनिया के और देशों की तरह कम से कम इजरायल का विरोध ही इक बार दबे ज़ुबान मे कर दे...या भारत की बची-खुची सारी इज़्ज़त मिट्टी-पलिद कर देगा
  • Ashu Bhatnaagar हमारे हित अहित का सवाल इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना महत्वपूर्ण सबकी स्वतन्त्रा का सम्मान करना है.--क्या सोच है सर आपकी ;p एक देश के तोर पर हमारे हित अहित महत्वपूर्ण नहीं है , सच मैं आप कुछ नहीं है अगर होते तो ना जाने क्या कर बैठते
  • Charlie Pareek Israel Palestine clash is purely for power but idiots like you mr mourya giving it political and religious color.
    Guys like you want nothing but a chance to curse government.
    लोगों की जान की इतनी ही परवाह होती तो यहाँ बैठे लम्बी लम्बी कहानियां ना लिखकर 
    उक्रेन में एक हवाई जहाज को मार गिराने जिसमे 295 बेक़सूर नागरिक सवार थे
  • श्यामसुंदर बी. मौर्या ये सरकार की खामोशी...............इजरायल का विरोध ना करना मानवता के साथ-साथ इस देश औरदेश की १२५ करोड़ देश-वासियों के मान-सम्मान को भी आहत करता है...
  • ऋषभ कृष्ण सक्सेना · 13 mutual friends
    इतना लंबा लिख मारा...
    लिखकर खुद पढ़ा भी??
    पढ़ लेते तो शायद खुद ही डिलीट कर डालते।
  • Rehan Khan Bahut Behtareen janab ! Post of the month .
  • Charlie Pareek Rehan khan and event of the month is Killing of civilians in syriya and iraq 
    Hai na
  • Rehan Khan Never charlie , even that is wrong . By the way who has created iraq problem ?
  • श्यामसुंदर बी. मौर्या Event of the month है सरकार का हाफिज सइद से वार्ता करना ।
  • श्यामसुंदर बी. मौर्या हाफिज सइद से वार्ता ।। ....event of the month हैं ।
  • Charlie Pareek Even that is wrong Rehan but how many times you utter a word against innocent killings in iraq or Syria.
    Or killings in kashmir or ukraine not a single time.

    Maurya sir you are already in ignored list due to your foolishness so I don't think I reply on your idiotic comments.
  • Majid Quresshi · Friends with Nadeem Akhter
    Charlie Pareek did u said something or post something for syria ,iraq, kasmiri pandits , better u saw the news muslims demonstrating against these acts, n rmve hatred agnts muslims
  • श्यामसुंदर बी. मौर्या बहुत इन्टेलिजेन्ट अपने मुह से बन लो ।यही अाता है अन्धभक्तो को ।तर्क करना गधो के बस की बात नही । जो सवाल किया हु उसका कोई जबाव हैं तो दो या पागलों की तरह सिरिया सीरिया करते रहोगे Charlie ji..
  • Charlie Pareek Majid yes I posted against any crime against humanity without biasing towards religion.
    You guys making a pure political issue a religious issue.

    Majid my problems is why shouting against israel only why not against everyone who is killing innocent people.
    As you see when I asked question about Syriya or Iraq
    I didn't get one reply who said its wrong too.
    The problem the mask of pseudo humanity and secularism just for polarization of a community.
    By making Israel Palestine a religious issue people are spreading communal hatred.
    Maurya keep shitting from your mouth you are ignored .
  • Asif Khatri Kamal hai kuch kathit rashtarwadi kah rahe hai ki israil ki sena philistiniyo ko kah rahi hai ki gaza pati chod kar surkshit isthan par chale jao,un aankh k andho se mein puchna chahata hu ki ab gaza me surkshit jagah kounsi bachi hai jhan phalistini jaan bachane k liye chale jaye....mahaz gaza to chota sa jamin ka tukda hai, isliye ye yahudiye ka ghatiye propganda failana band karo....israil to chahata hi yahi jyada se jyada nirdosh nagrik mare taki philistini nagrik darkar gaza pati chod kar padosi arab mulko me saran le....aur ye samsya khatam ho....!!
  • Sajid Azad जो इजराइल इजराइल चिल्ला रहे है उनसे एक ही सवाल.....अंग्रेजो ने भारत पर कब्जा कर लिया था तब उनको भगाने के लिऐ हिंसक व अहिंसक आंदोलन क्यों हुऐ....??? इजराइल इजराइल चिल्लाने वालो अगर तुम्हे हमास आंतकवादी लगते है तो फिर भगत सिंह सुभाष चन्द्र बोस और सभी भारतीय स्वतंत्रता सैनानी भी आंतकी लगते होंगे
    23 hours ago · Unlike · 4
  • Sajid Azad इजराइल को स्पोर्ट करने वाले अगर इतना ही चिंतित है तो उन्हे भारत मे जगह दे दो .....वैसे भी भारत मे तो शुरु से बाहरी लोगे का आगमन रहा है जो अब भारत के मुल निवासी बन गये है...वरना भारत के मुल निवासी तो केवल दलित है वरना बाहरी लोग मे कोई हुणो की संतान है कोई आर्यो की कोई मुगल कोई अंग्रेज...ये समय समय पर भारत मे आऐ और शासन किया और यही के होकर रहे गये ..इसी तरह यहुदियो को भी बुला लो....तब पता चलेगा की यहुदी कैसी कौम है...1946 मे .बिर्टेन ने यहुदियो को फिलीस्तीन मे क्यो बसाया ...अगर बिर्टेन को यहुदियो से इतनी हमदर्दी थी तो बिर्टेन मे ही बसा लेता...लेकिन बिर्टेन को यहुदीयो की हरकत पता थी इसलिये अपने से दुर बसाया....ज्यादा जानना हो तो हिटलर की बुक मेरा संघर्ष पढ
    23 hours ago · Unlike · 2
  • अमरनाथ 'मधुर' संघी भाईओं ज्यादा उछल कूद करने की जरुरत नहीं है .बस ये बता दीजिये हिटलर ने यहूदियों का संहार करके गलत किया था या सही किया था ? हम कहते हैं हिटलर अपराधी था उसने यहूदियों का संहार करके बड़ा अपराध किया था.हम हिटलर और उसकी नाजी विचारधारा के खिलाफ हैं आप बताओ उसके साथ हो या उसके खिलाफ हो ?
    क्या आप यहूदियों को अपने घर मकान और जमीन जायदाद दोगे जो वे फिलस्तीनियों से जबरन छीन रहें हैं और आप बेशर्मी से उनका समर्थन कर रहें हैं ? क्या आप पाकिस्तान को कश्मीर छीन लेने दोगे जो फिलस्तीनियों से गाज पट्टी छीनी जा रही है ?
    23 hours ago · Like · 1
  • Charlie Pareek मुलायम के चमचों मौका परस्तों झूठे सेकुलरों इजराइल इजराइल रो रहे हो इराक में जो हो रहा है वो बोलते हुए तो मूह में गोंद लग जाता है ना
    ना सीरिया दीखता है मूर्खों समझ नहीं आता मेरा कहना की जितना इज्रैल गलत है उतना ही गलत सीरिया ईराक लीबिया में मासूमो का मारा जाना है 
    पर उन मासूमों की मौत नहीं दिखती साले ढोंगियों को 
    सीधा सवाल पूछा है की क्यों नहीं दीखते दुसरे देशों में मरने वाले मासूम?
    इतनी ही फ़िक्र है तो मचाओ शोर जो ईराक में मार रहे सीरिया में नैजीरिया में लीबिया में मार रहे
    पर नहीं उनके बारे में बोला तो सेक्युलर चड्डी फट जाएगी
    लगाते उन276 मासूम के पक्ष में फोटो जिनको किडनैप किया है 
    या मलेशिया के 295 बेक़सूर नागरिको के बारे में फोटो जिनके जहाज को मार गिराया
    पर नहीं आपको सिर्फ पलेस्टाइन ही दिखता है
    दोगले घटिया मौकापरस्त
    जब कुछ बोलने को ना मिला तो संघी संघी चिल्लाने लगे।
  • Sajid Azad ईराक सीरिया लीबिया को फिलीस्तीन का समर्थन करने की किमत अमेरिका का हमला झेल कर चुकानी पडी है चार्ली......अमेरिका जब लाखो लोगे को मार गया तब आप क्यो चुप थे.....अब वही के बाशिंदे अपनी जमीन के लिऐ अमेरिका की कठपुतली सरकार से लड रहे है तो आप लोगो के बडा बुरा लग रहा है....इनकी जमीन को छिना गया माँ बहनो की इज्जत लुटी गई इनके बच्चो को मारा गया तो ये क्या करेंगे...अगर आप के साथ ऐसा हो तो आप क्या करेगे.....??
    20 hours ago · Unlike · 1
  • Sajid Azad मलेशिया के जहाज को किसने गिराया.....??? ईराक ने ईरान ने लीबीया ने सीरीया ने......नही इसके गिराया रुस ने ....जिसमे अमेरिका के २३ नागरिक थे....अब अमेरिका क्या करेगा....अगर कोई छोटा देश होता तो अमेरिका अब तक हमला कर चुका होता......
  • Sajid Azad ईराक अफगानिस्तान लीबीया सीरिया मे अमेरिका ने २०-२५ लाख लोगो को मारा तब आप भी खामोोश रहे और इंसानो की मौत को विकेट और गोल से तुलना करते रहे
    20 hours ago · Unlike · 1
  • Charlie Pareek वहां के बाशिंदे? isis के तालिबान समर्थित आतंकवादी बेगुनाह बाशिंदे वाह आप तो बात करने लायक ही नहीं
    धर्म के नाम पर पूर्वाग्रह से ग्रसित झूठे नकाब ओढ़े रहते है
    किसी भी बेकुसूर का मारा जाना गलत है क्या इराक लीबिया सीरिया में नागरिक नहीं मर रहे
    आपके लॉजिक के हिसाब से तो इजराइल भी हमास के विरुद्ध हमला कर रहा है
    तो आपको मिर्ची क्यों लग रही है
    और आप क्या निरे गधे है मैं कब से ये कह रहा हु की हर जगह जो हो रहा है वो गलत है फिर आप palestine को अलग और बाकि लोगों की मौत को अलग ढंग से क्यों देखते है 

    पूछो कुछ बोलते कुछ 
    पैदैशी ऐसे हो या कोई कोर्स किया है
  • Charlie Pareek आप जैसे कट्टर धर्मांध से बहस करना भी बेवकूफी है 
    क्या पता किसी दिन 72 हूरों के लालच में आप खुद ही किसी को मार दे
    इसलिए अपना सडा दिमाग पास रखिये और खुश रहिये
  • Sajid Azad तुम लोग कश्मीरी पंडितो का रोना भी बहुत रोते हो लेकिन उनको वापस कश्मीर मे बसाने के कितने प्रयास करे....? अब तो बीजेपी की सरकार है उनको पुरी सुरक्षा के साथ वापस बसाया जाये.....जिनका घर छिनता है घरवाले मरते है उनके दिल से पुछा जाऐ....बेरहमो को सपोर्ट करना बेहरमो का साथ देने के बराबर है
  • Sajid Azad आप कि नजर मे आंतकवाद की परिभाषा विशेष समुदाय से जुडी है.....आपकी आँखो पर खाकी चश्मा लगा है जो विशेष समुदाय के कत्ल को जायज ठहराता है.....आप जैसो से बहस करना खुद को बेवकुफ ठहराना जैसा है......
    20 hours ago · Unlike · 1
  • Charlie Pareek तुम लोग 
    मतलब आपको तो लेना देना ही नहीं उनकी हालत से
    हर एक कमेंट के साथ घटिया मानसिकता की परते दिख रही है
    गलती हो गयी जो ऐसे घटिया सोच वाले को जवाब दिया
    माफ़ करो 
    इतना कचरा भरा है धर्म और पूर्वाग्रह के नाम पर वो तो जन्मो तक कोशिश करलो नहीं हटेगा।
    बेवकूफ तो सर्टिफाइड हो आप
  • Sajid Azad जी हम तो नीरे गँवार है सारी समझदारी आप मे ही है....
  • Charlie Pareek हमास को देशभक्त बोल के आपने एक ठीक बता दिया की आप नीरे बेवकूफ है
    चलो इतनी प्रोग्रेस तो हुई की खुद को पहचानना शुरू कर दिया 
    अभी तो और भी realizations होंगे की नीरे बेवकूफ ही नहीं धर्मांध भी हो कट्टर भी हो पूर्वाग्रह से ग्रसित भी हो।
    लगे रहो गेट वेल सून
  • Sajid Azad ईराक लीबीया सीरिया को रोना रोने वाले की पुरी profile
    मे एक बार भी इजराइल की भर्त्सना नही है 
    और हमे यहाँ पर पढाई करवा रहे है की ईराक लीबीया 
    की भर्त्सना क्यों नही की....
    कह तो ऐसे रहे है जैसे इन्होने तो इजराइल की
    अमानवीय हरकतो के लिऐ बहुत पोस्ट डाली हो
    19 hours ago · Edited · Unlike · 1
  • Charlie Pareek पढ़ ली प्रोफाइल 
    चलो इस बहाने बरसों बाद कुछ अच्छा तो पढ़ा 
    और पढना हो तो ब्लॉग भी है पेज भी है
    इस बहाने थोड़ी बुद्धि ही आ जाये 
    मुझे आरोपित करके क्या तुम isis के कृत्यों को सही ठहरा रहे हो मूर्ख शिरोमणी
    लगे रहो गेट वेल सून
  • कमल सिंवर · 4 mutual friends
    दुनिया सिर्फ इजरायल का हाथ क्यों बांधना चाहती है। हमास, हिजबुल्ला जैसे इस्लामिक आतंकवादियों की हिंसा को नजर अंदाज क्यो करती है। फलस्तीन की अपनी कोई अर्थव्यवस्था नहीं है,अगर अमेरिका-यूराप से आर्थिक सहायता न मिले तो फलस्तीन की आबादी बेमौत मर सकती है। मुस्लिम देश हमास जैसे आतंकवादी संगठनों को इजरायल से लड़ने के लिए धन और हथियार तो जरूर देते हैं पर मुस्लिम देश फलस्तीन की आबादी को शिक्षित बनाने,उनकी गरीबी दूर करने वाली योजनाओं के लिए धन देने के लिए तैयार ही नहीं होते हैं। फलस्तीन, कश्मीर, चैचन्या आदि जगहों पर मुस्लिम देशों की यह कारस्तानी छिपी हुई भी नहीं है? मुस्लिम देश आतंकवादी संगठनों और आतंकवादी मानसिकता के प्रसार पर ही धन क्यो खर्च करते हैं, इस पर भी दुनिया को चितन-मनन करना चाहिए?
    16 hours ago · Like · 2
  • Govind Singh Parmar आदरणीय इजरायल के साथ इसलिए है कि इजरायल से कुछ सीखा जा सकता है ,ज्ञान, विज्ञान ,प्रवंधन ,हौसला ,स्वाभिमान ,सम्मान ,फिलिस्तीन से क्या सीखा जाय ,अरब से क्या सीखा जाय ,कुछ हो तो बताये ,आखिर पूरी दुनिया यहूदियों को जमीन का एक टुकड़ा देने को क्यों तैयार नही ,अभी अलजजीरा चैनल पर एक कुर्द नेता का इंटरव्यू सुन रहा था ,बता रहा था बर्बर ,हिंशक सद्दाम ने हजारो हजार कुर्दों का संहार किया ,क्या यह सच है ,अगर हां तो क्या कश्मीर में उस दमन के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे ,शायद नही ,पांच गाँव और बाद में सुई की नोक भर जमीन न देने का परिणाम हम देख चुके ,यही यहाँ भी होना है ,जब एक बार यु एन ओ इजरायल बना दिया तो क्यों एक साथ सात सात देशो ने मिलकर उस पिद्दी से देश जिसकी उस समय जनसँख्या ३० लाख भी नही रही होगी ,आक्रमण किया ,क्या इजरायल हथियार समुद्र में फेंक दे ,अगर इजरायल लड़ना और आक्रामकता छोड़ दे तो चारो ओर से घेरे कट्टर धर्मांध देश दस दिन में उसका आस्तित्व मिटा देंगे ,तीन दिन पहले अफगानिस्तान में आतंकी हमले में ८९ लोग एक साथ मारे गए ,अगले दिन ईराक में एक साथ २९ महिलाये मार डाली गयी ,तब कहा गए थे प्रदर्शन वाले ,वो आपस की बात है न
    13 hours ago · Unlike · 1
  • अमरनाथ 'मधुर' गोविन्द भाई आपका कॉमेंट पढ़कर बहुत अच्छा लगा. मुझे आप जैसे मित्रों की ही जरुरत है जिनके साथ सार्थक चर्चा की जा सके.आपने जो कहा सही कहा है की इजराइल से बहुत कुछ सीखा जा सकता है.सीखिये किसने मना किया है ? आज पूरी दुनिया में इजराइल के अस्तित्व खिलाफ कोई नहीं है ,अरब देश भी नहीं हैं. लेकिन ये तो बताओ क्या फिलस्तीनियों को अपना देश नहीं चाहिए ? माना हमें उनसे कोई लाभ नहीं है लेकिन इंसानियत का तकाजा है कि हम उनके जिन्दा रहने के अधिकार का समर्थन करें. अगर हम इजराइल का सम्मान करते हैं और इजराइल हमारा सम्मान करता है तो यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम इजराइल को स्वतंत्र फिलस्तीन का सम्मान करने के लिए प्रेरित करें. अगर पश्चिमी एशिया में शान्ति रहती है तो वह भारत ही नहीं सारी दुनिया के हक़ में अच्छा है , विशेष रूप से इजराइल के भी हक़ में है. इजराइल पर अकारण हमला करने वाले संगठन शान्ति के दुश्मन हैं. दुनिया में कोई भी भद्र जन आतंकवादी वारदातों का समर्थन नहीं करेगा.
    12 hours ago · Like · 2
  • Sajid Azad हमास हिज्जबुला तो आंतकवादी लगते है लेकिन मोसाद को क्लीन चीट....मोसाद अब भी जर्मन नाजियो के खानदान को ढुँढ ढुँढ कर मार रहा है....और रही बात शिक्षा की तो इजराइल दुनिया मे 38 वे नंबर है और 94% शिक्षा है...जबकी फिलीस्तीन 77वे नंबर पर है 88% साक्षरता दर से....एशिया के कई देशो से आगे....दिन रात इजराइली हमलो के बावजुद 88% साक्षरता दर कम नही है....अपनी आँखे खोलो तो फिलीस्तीन मे भी बहुत कुछ है उनसे भी सीखा जा सकता है....IT सेक्टर मे फिलीस्तीन का कोई सानी नही है
    9 hours ago · Unlike · 2
  • Govind Singh Parmar आदरणीय आपकी बात से सहमत हूँ ,जैसे इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है ,ऐसे ही फिलिस्तीन को भी ,अलजजीरा चैनल पर छोटे छोटे मासूम बच्चो के शरीर से बहते खून और महिलाओ बच्चो की ह्त्या को कोई भी जायज नही कह सकता ,इजरायल की आज लड़ाई फिलिस्तीन से न होकर हमास से है ,हमास आतंकी संगठन है ,कल भी इजरायल द्वारा संघर्ष विराम को हमास ने नकार दिया ,जब आतंकी घर में छिपा हो तो उसे मारने के प्रयास में यह बेगुनाह मारे जा रहे है , इतनी आक्रामक नीति के अलावा इजरायल के पास बने रहने का कोई रास्ता नही ,हमास ने तीन इजरायली टीनेजर को मारा ,उसी की यह प्रतिक्रिया है जिसमे इतने बेगुनाह मारे गए
  • Govind Singh Parmar भाई साजिद आजाद जी मैंने एक बार अपनी पोस्ट में लिखा था कि दुनिया की सात अरब आबादी में इस्लाम और हिन्दुओ का हिस्सा आधा है ,आप कभी साहित्य ,विज्ञान ,कला ,खेल में इन आधे लोगो का हिस्सा देख लो ,१०% भी नही होगा ,दुनिया में १५० करोड़ मुश्लिम या १०० करोड़ हिन्दुओ द्वारा विज्ञान में किये योगदान से ज्यादा अकेले १५० लाख यहूदियों का है ,अपनी कमियों को मानना सीखिये ,आज आप जैसे बुद्धिमान लोगो के कंधो पर अपने समाज को नयी सोच देने की जरूरत ज्यादा है ,मैंने पाया है की अगर कोई रामायण की आलोचना करे तो मै बहुत संयत ढंग से तर्क दूंगा ,लेकिन अगर कोई आपकी किताब की आलोचना करे तो आप कितने संयत होंगे ,खैर अभी अलजजीरा पर अभी फिलिस्तीन के एक साल के बच्चे के शरीर से बहता खून देख रहा हूँ ,यकीन मानिए उतना ही बुरा लग रहा है जितना किसी हिन्दू बच्चे के जख्म देखकर
    9 hours ago · Like · 1
  • Sajid Azad सर जी मे भी हत्याओ को जायज नही ठहराता....लेकिन मेरे एक बात समझ से परे है की हमास को आंतकवादी क्यो कहा जाता है...क्या हमास के लडाके कश्मीर सीरीया अफगानिस्तान लडने गये है कभी....?? इजराइल और फिलीस्तीन की लडाई जमीन की ही नही है...ये लडाई मस्जिद ऐ अक्सा की है जिस पर इजराइल ने कब्जा कर रखा है....और ये लडाई हमास उसी के लिऐ लड रहा है और ये लडाई शायद ही खत्म हो....अजीब रिवाज है दुनिया का हमास हमला करे तो आंतकी इजराइल हमला करे तो आत्मरक्षा......जबकी कल एक इजराइली मंत्री का बयान आया है की हम फिलीस्तीनी औरतो बच्चो को भी मारेंगे जिससे की ये औरते बच्चे ना कर सके.....
    8 hours ago · Unlike · 1
  • Govind Singh Parmar भाई साजिद जी अगर यह बयान है तो यह निंदनीय है ,बेगुनाहो को जानबूझकर मारने की इजाजत कोई सभ्य समाज नही दे सकता ,हमास ने भी सैकड़ो रॉकेट दागे लेकिन इजरायल के पास उससे बचाव की व्यवस्था है इस कारण उसका नुक्सान नही हुआ ,आपने जिस मस्जिद की बात कही उसका विवाद सूना तो है लेकिन हमें प्रामाणिक तौर पर ज्यादा जानकारी नही है ,अंतर्राष्ट्रीय समुदाय आगे आकर सीमा विवाद को निबटाए और यदि हमास किसी आतंकी गतिविधि में लिप्त है तो उसके खिलाफ कार्यवाही कर इजरायल से भी शान्ति बनाये रखने का दबाब बनाये ,मुझे अभी तक हमास आतंकी संगठन ही लगता था ,सही क्या है नही कह सकता ,ताकतवर कभी नही झुकता ,कमजोर को ही समझौते की जुगाड़ करनी पड़ती है ,फिलिस्तीन को इस दिशा में आगे आने चाहिए ,अराफ़ात की सख्सियत ज्यादा बेहतर थी ,आज उस स्तर का नेता इनके पास नही
    8 hours ago · Unlike · 1
  • Ravindra Kumar Srivastav · 4 mutual friends
    sir jee...ek bat mujhe samajh main nahi aate....Iraq par hamla hota hai ....saudi, Iran , UAE, Kuwait, Egypt......etc ....kisi desh main virodh pradarshan nahi hota , sarkari sampati nuksan nahi ki jati. Israel - philistin ke matter ko lekar ( meri jan...See More
    8 hours ago · Unlike · 1
  • Parkar Dilyar · Friends with Rafiq Rafiq and 2 others
    Hitler sahi tha jisne 60 lakh israel ko mara.un chote- chote bacho ne kya bigada tha israel ka ager ye bacche apke country ke mar jate toh ap kya karte?
    5 hours ago · Unlike · 1
    • Sajid Azad ryt गोविंद जी.....
    • Prateek Tyagi क्या Israel को जीने का हक़ नहीं ?
      क्या उसको इस ज़मीन से समाप्त करने की अरबों ने कसम नहीं खाई थी ???
      क्या आज भी मुसलमान , उस पर कभी हमला ना करने का Promise करते हैं ???

      अगर नहीं , तो . . .उसे भारत की तरह , चीन और पाकिस्तान से रोज़ जूते ख़ाता रहना चाहिए ???
      उसे आत्म रक्षा के लिए , दुश्मन को उसके घर जा कर ठोकना ग़लत है क्या ???
      जहाँ तक मरने की बात है , वो तो किसी का भी मरना बुरा है . .
      पाकिस्तान मे मुसलमानो को कौन मार रहा है ?
      इराक़ में मुसलमानो को कौन मार रहा है ???
      मरना मारना तो इनकी फ़ितरत है | हिंदू कम हैं क्या ?? भारत में रोज़ कितने हिंदू , हिंदुओं का कतल कर रहे ?? 
      कोई बोलता है क्या ????
      अपना घर संभलता नहीं , दुनिया की फ़िक्र में मरे जा रहे हैं . . .
    • Sajid Azad इसराइल और फ़लस्तीन के बीचमौजूदा संघर्ष की स्थिति में भारत किस तरफ़ है? भारतकी विदेश मंत्री के मुताबिक भारत केदोनों देशों से दोस्ताना संबंध हैं, इसलिए राज्यसभा में इस मुद्दे परचर्चा नहीं हो सकती.भारत और अरब देशों के बीच हमेशा से बेहतर संबंधरहे हैं लेकिन मौजूदा समय में भारतकी चुप्पी का असरआपसी संबंधों पर पड़ सकता है. इससे तेल आयात सेलेकर अरब देशों में बसेभारतीयों की सुरक्षा तक पर सवालिया निशानउठ रहे हैं.इस पूरे प्रसंग के ज़रिए भारतीयजनता पार्टी की विदेश नीति परसवाल उठा रहे हैं पूर्व केंद्रीयमंत्री मणिशंकर अय्यर.मणिशंकर अय्यर का पूरा विश्लेषण विस्तार से पढ़िए.भारत की विदेश मंत्री इसराइल औरफ़लस्तीन के मुद्दे पर बहस सेबचना चाहती हैं. इसके पीछे दो वजहेंहैं. एक तो सुषमा स्वराज का दावा है कि कि भारत के दोनों देशों के साथदोस्ताना रिश्ते हैं, ऐसे में उन दोनों देशों के तनाव परचर्चा की क्या ज़रूरत है.दूसरी ओर, उनकेप्रधानमंत्री अभी विदेश यात्रा पर हैं. शायदइस वजह से वे अपनी सरकार की विदेशनीति को लेकर निश्चिंत नहीं हैं.भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र मेंपरंपरागत विदेश नीति को जिस तरह से सुदृढ़ औरफोकस्ड बनाने की बात कही गईथी, अगर यह उसका उदाहरण है तो निश्चित तौर परआने वाले दिनों में हम बड़ी मुश्किल में फंसने वाले हैं.1938 में, महात्मा गांधी ने फ़लस्तीन केसाथ हमारे परंपरागत दोस्ती की शुरुआतकी थी. उन्होंने तब कहा था,"फ़लस्तीन फ़लस्तीनियों के लिए है, जैसेइंग्लैंड अंग्रेजों के लिए है और फ़्रांस फ़्रेंच लोगों के लिए."तब से भारत इसी राह पर चलता रहा. 1947 में संयुक्तराष्ट्र की दो समितियों के सदस्य के रूप में भारतको फ़लस्तीन पर लीग ऑफ़ नेशंसद्वारा थोपे गए प्रावधानों को आंकने का मौका मिला था. तब भारत ख़ुदही विभाजन की कगार पर था, लेकिन उसनेफ़लस्तीन के विभाजन का विरोध किया था.1947 से है रिश्ताभारत ने उस वक्त जो तर्क दिए वो आज भी प्रासंगिकहैं. भारत का तर्क था कि विभाजन से यहूदी-अरबकी समस्या खत्मनहीं होगी, बल्कि बढ़ेगी.भारत फ़लस्तीन के संघीय ढांचे के पक्ष मेंथा, जिसमें निश्चित क्षेत्र को यहूदी लोगों को देदिया जाता और दूसरे इलाके को अरब क्षेत्र घोषित किया जाता.इन दोनों देशों को एक कॉमन सेंटर से जोड़ा जाता, जिसका चुनावलोकतांत्रिक तरीके से संभव था. इससे यहूदियों को घरमिलता, लेकिन वह अरब के लोगों की कीमतपर नहीं.इससे यहूदी और अरब लोगों के बीचआपसी संबंध भी बेहतर होते. सोवियतसंघ और पश्चिमी देशों के दबाव में संयुक्त राष्ट्र केसदस्य देशों ने विभाजन के पक्ष में मतदान किया, लेकिन भारत अपनेमूल रूख़ पर कायम रहा. नवंबर, 1947 में फ़लस्तीनके विभाजन के विरोध में मत डालने वाला भारत दुनिया का इकलौता ग़ैर-अरब और ग़ैर-मुस्लिम देश था.अरब आज तक उस बात को नहीं भूले हैं. लेकिनभारतीय जनता पार्टी इसे भूलचुकी है. बीजेपी के मुताबिकफ़लस्तीन का पक्ष लेनातुष्टीकरणकी नीति है. यह रवैया जिन्ना के उस बयानको जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत एक हिंदू राष्ट्र होगा,धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं, को मान्यता देने जैसा है.दरअसल भारत की हिंदुत्ववादी ताकतेंहमेशा से इसराइल के पक्ष में रही हैं. अरबविरोधी, मुस्लिम विरोधी नज़रिए से संघ केएजेंडे को फैलाने में मदद मिलती है. भारत के पूर्व विदेशमंत्री यशवंत सिन्हा ने तो यरुसलम में यहां तक कहदिया था कि भारत अपने मुसलमानों के तुष्टीकरण के लिएलंबे समय तक इसराइल को राजनयिक तौर परमान्यता नहीं देता रहा.
      तुष्टिकरण का मामला नहीं
      यह बकवास था. हमने इसराइल के साथ अपने राजनयिक संबंध
      तभी बहाल किए, जब यासिर अराफ़ात ने
      पीवी नरसिम्हा राव को गोपनीय
      ढंग से सूचना भेजी कि ऑस्लो में चल
      रही गुप्त बातचीत में इसराइल
      फ़लस्तीन को देश के तौर पर स्वीकृति दे
      रहा है.
      अरब और फ़लस्तीन के लोग यह जानना चाहते हैं
      कि इसराइल द्वारा 13 जून और 7 जुलाई को शुरू सैन्य अभियान के बारे
      में भारत की क्या राय है? करीब एक
      महीने की हिंसा में194
      फ़लस्तीनी मारे गए हैं. इनमें बच्चे और
      महिलाएं शामिल हैं.
      करीब 1450 लोग घायल हुए हैं. 13,000 लोगों के घर
      तबाह हो गए. 21,000 लोगों को अपने ठिकानों से विस्थापित
      होना पड़ा है. लोग स्कूलों और अस्पतालों में शरण लेने के लिए
      मजबूर हैं, लेकिन इस हालत पर भारतीय
      जनता पार्टी के नेतृत्व वाली भारत सरकार
      चुप है.
      हालात इससे भी बदतर हैं. विदेश मंत्रालय के
      प्रवक्ता का वो बयान है जिसमें उन्होंने गज़ा में हो रहे हवाई
      हमलों की तुलना इसराइल में सीमा पार रॉकेट
      हमले से की है जिसमें
      किसी की मौत नहीं हुई है.
      फ़लस्तीन इस पूरे मामले को संयुक्त राष्ट्र के
      महासचिव के सामने 7, 11 और 14 जुलाई को उठा चुका है. लेकिन
      मोदी के नेतृत्व में भारत को इस मसले पर न कुछ
      कहना है और न करना.
      चुप्पी से नुकसान
      दिल्ली स्थित
      फ़लस्तीनी दूतावास ने भी भारत
      से अपील की है, "इन परिस्थितियों में
      इसराइल जिस तरह का भेदभाव चाहता है, उससे
      भारतीय प्रशासन को इनकार करना चाहिए. दोनों देशों के
      बीच कोई साम्य नहीं है. एक तरफ़
      परमाणु क्षमता से संपन्न देश तो दूसरी ओर
      कॉलोनी में रहने वाले लोग जिनके पास कोई
      सेना नहीं है."
      झूठे प्रचार में विश्वास रखने वाली भारतीय
      जनता पार्टी की सरकार कह
      रही है कि इसराइल में 70 से 80 हज़ार
      भारतीय काम कर रहे हैं. लेकिन सरकार यह
      नहीं बता रही है कि अरब देशों में 70 से
      80 लाख भारतीय लोग मौजूद हैं.
      ये लोग हर साल लाखों डॉलर भारत भेजते हैं और
      उन्हीं पैसों से हम इसराइल से हथियार
      खरीदते हैं. ईरान से लेकर लाल सागर के इलाके से
      ही हमारा 70 फ़ीसदी तेल
      आयात होता है.
      नैतिकता और राष्ट्रीय हित का तकाजा है कि हमें अरब
      देशों से बेहतर संबंध बनाकर रखने चाहिए. अगर इस दिशा में
      गंभीर कोशिशें नहीं हुईं तो हम अरब
      देशों के साथ वो सद्भावना खो देंगे, जो बीते सात दशक में
      बनी है.

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें