बुधवार, 2 जुलाई 2014

भगत सिंह की औलाद











'हम कोई गाँधी की संतान  हैं ? हम चंद्रशेखर की औलाद हैं, हम भगत सिंह की औलाद हैं .'                                                                                                                 --- डा लक्ष्मीकांत वाजपेयी प्रदेश अध्यक्ष (भाजपा-उत्तर प्रदेश  )
जी साहब, जी हजूर आप सही कह रहे हैं .लेकिन हमने जो इतिहास पढ़ा है उसमें कहीं नहीं लिखा है कि हमारे वीर क्रांतिकारियों ने कभी भी कहीं भी प्रेस वालों पर हमला किया हो .अब आपके हुड़दंगी अगर ये सब कर रहे हैं और आप कह रहें हैं कि वे चंद्रशेखर की औलाद हैं ,वे भगत सिंह की औलाद है तो जरूर हमने गलत इतिहास पढ़ा है. तो हजूर सबसे पहले तो इतिहास को दुरुस्त किया जाना चाहिए और लिखें कि जिस तरह से हमारे बहादुर हुड़दंगी विधान भवन पर चप्पल जूते फेंक  रहे हैं  वो सब आगे चलकर भगत सिंह की तरह बम फेंकने तक जाएगा. ये तो बड़ा सीधा सा रास्ता है कोई भी इस पर चल सकता है .हाँ भगत सिंह क्या लिखता पढता था इसका जिक्र बिलकुल मत कीजियेगा .उसकी किसी किताब या लेख का तो बिलकुल भी जिक्र नहीं करना है, बेकार में कार्यकर्ता बहक जाएंगे .
वैसे एक बात पूछूँ हजूर आप सीधे नाथूराम गोडसे का नाम क्यों नहीं लेते हैं ? वो भी तो बहादुर आदमी था .उसने गाँधी को कितनी बहादुरी से निपटाया था. गोडसे ने गाँधी के पाँव छूए ,गाँधी ने उसे दिल से लगाने के लिए हाथ बढ़ाये और वीर गोडसे  ने बिना देर किये सीधे गाँधी के सीने में गोली दाग दी. धाँय धाँय धाँय . लगा दिल से ,ये ले तेरे लिए दिल से लगाने की चीज ये है . हो गयी क्रान्ति.भारत माता की जय.
   ऐसे बहादुर आदमी को याद किया करो ना क्या चंद्रशेखर और भगत सिंह का नाम लेते हो ? चंद्रशेखर को तो एक स्त्री ने पकड़ लिया तो बुत बना थप्पड़ खाता रहा, धक्का तक  नहीं दे सका. सांडर्स को गोली मारकर निकले तो पीछा करने वाले सिपाही के पैरों में ही गोली मारी कि नाहक ही क्यों किसी की जान ली.  एक भी तो उदाहरण नहीं मिलता जब उन्होंने किसी बेक़सूर को चोट पहुंचायी हो . अब अगर ये गलत इतिहास है तो हजूर इसे तुरंत बदल दें .इसे पढ़कर मेरे जैसे सिरफिरों का जीवन तो बेकार हो ही गया कम से कम नयी पीढ़ी तो गुमराह ना हो .  





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