सोमवार, 21 जुलाई 2014

ना हम गुजरात भूले हैं


मुजफ्फर नगर नहीं भूले ना हम गुजरात भूले हैं
ना हैवानों ना शैतानों की हम औकात भूलें हैं
हमें है याद तुमने महात्मा गाँधी को भी मारा
ओ गद्दार ए वतन तेरी नहीं हम जात भूलें हैं.

वो तुम ही थे फिरंगी के रहे हामी बने शातिर
लड़े हम जंगें आजादी गए जब दुश्मनों से घिर
न कोई और था वो जो हमें कुछ घाव दे पाता
तुम्हीं थे जो दगा करके फिरंगी के बने मुखबिर.

हमें बस देखना ये है जो फैलाया जहर तुमने
ये पूरा मुल्क ना झेले जो झेला है कहर हमने
यही बस सोचकर हम जहर पीते और मरते हैं
कि अजगरिया किया है आज फिर से बेअसर हमने.

वतन अपना हमें है जान से प्यारा ये तुम सुन लो
ना छेड़ो राग नफ़रत का लो हमसे प्यार की धुन लो
हमेशा मुल्क की हम ख़ाक में मिल फूल बन खिलते
तुम्हें ये नापसंद तुम मुल्क कोई दूसरा चुन लो .


     

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