रविवार, 27 जुलाई 2014

अखंड भारत हिन्दू राष्ट्र


        आर एस एस के स्वयंसेवकों ने हिन्दू राष्ट्र को हवा देने का काम शुरू कर दिया है.किन्हीं अमेरिका पलट विद्वान ने हिन्दू राष्ट्र जिसे वो अखंड भारत अविभाजित भारत भी कहते हैं का नक्शा भी जारी किया हैजिसमें पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान, नेपाल,बर्मा. बांग्लादेश और श्रीलंका शामिल हैं. भूटान और मालद्वीप का पता नहीं वे भी शामिल किये गए हैं या नहीं.लेकिन उनका कहना है कि यही प्राकृतिक भूभाग है जो प्राचीन अखंड भारत है तथा जिसको पुनर्स्थापित किये जाने की जरुरत है .
आर एस एस इस परिकल्पना को जिस किसी भी रूप में लेता हो लेकिन इस प्राकृतिक भूखंड को जिसे अब भारतीय उपमहाद्वीप कहा जाता है एक क्षेत्रीय परिसंघ के रूप में आकार दिए जाने में कोई बुराई नहीं है.यह एक क्ष्रेत्रीय आर्थिक सहयोग संगठन और राजनीतिक गठबंधन हो तो विश्व पटल पर एक ऐसी महाशक्ति का रूप भी ले सकता है जो विश्व शांति और न्याय की जमानत ले सकता है .
        वैसे आज के हालात को देखते हुए इसके स्वप्न कोई बहुत सुहावने नहीं होंगे. सोचो इसी परिसंघ के अंदर तालिबान के मुजाहिदीन भी होंगें और शिवसैनिक भी, हिंसा में लिप्त अहिंसा के पुजारी श्रीलंकाई और बर्मी बौद्ध भी होंगें और भारतियों को मारकर जानवर की तरह लटकाकर ले जाने वाले बांग्लादेशी कट्टरपंथी भी.
       ऐसे में क्या होगा ? क्या ये आपस में फुटबॉल खेलेगें या शतरंज ? पाकिस्तान ,बांग्लादेश ,मुसलमान, कश्मीर तथा इस्लाम और हिंदुत्व को खतरे वाली राजनीति का क्या होगा ? इन सबका का ढोल बजाकर भयादोहन करने वालों के लिए केंद्रीय सत्ता हासिल करना तो आकाश कुसुम हो जाएगा. तब केंद्रीय सत्ता पर कौन लोग काबिज होंगे ? वंचित और दलित वर्ग के बहुसंखयक लोग ही केंद्रीय सत्ता संभालेंगे .क्यूँकि इस सारे भूभाग में बहुसंखयक वही होंगे और उनका साथ क्षेत्रीय और भाषायी अल्पसंखयक भी देंगे. धर्म के नाम पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण या पुष्टिकरण की कोई जरुरत नहीं पड़ेगी.क्यूँकि उनके जायज हकों से उन्हें वंचित करने वाले खुद अल्पसंखयक होंगे और बहुत संभव है कि आरक्षण और विशेष सुविधाओं की मांग भी वे करते नजर आयें
इसलिए इस अखंड भारत की परिकल्पना का हम स्वागत करते हैं.काश यह साकार हो सकती तो कितना अच्छा होता .

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