रविवार, 6 जुलाई 2014

भारतीय देवियाँ और आतंकी

 'आतंकियों ने हमसे कहा- तुम हमारी बहनें हो ---: 46 नर्स में से एक नर्स का बयान । 
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 हम ने जिन्हें अपने देश में न इज्जत से रहने दिया और न सर उठाकर  जीने दिया वो भारत की देवियाँ विदेश में इज्जत से रहीं और सुरक्षित लौट भी आयीं. किन्तु जिन्होंने उन्हें बहिन का दर्जा दिया हम उन्हें आतंकी कहते हैं .उन्होंने  हिंसाग्रस्त इलाके से अपनी जान पे खेलकर उन्हें बाहर सुरक्षित निकाला और हम कहते  हैं यदि उन आतंकियों को उनके बाप का डर नहीं होता तो कभी का उन औरतों को नोच नोच कर खा जाते .हम कहते हैं कि उन्हें पता था कि भारतीय लड़ाकू  जहाजी बेडा आ पहुंचा है इसलिए वे डर गए .
    ये लड़ाकू जहाजी बेड़े पाकिस्तान से कितनी दूर रहते हैं जो आज तक उसने हाफिज सईद और दाऊद को भारत को नहीं सौंपा है ? ये श्री लंका और बांग्लादेश से कितनी दूर रहते हैं जो जब तब भारत को नीचे दिखाते रहते हैं  कभी भारत के मछुवारों को पकड़कर कभी भारतीय सैनिकों पर धोखे से हमला कर ? क्या इन्हें भारत से कुछ डर नहीं लगता है ?
 नहीं लगता होगा .लगना भी नहीं चाहिये.क्यूँकि सबको अपने देश के मान सम्मान के हिसाब से बर्ताव करने का हक़ है .लेकिन बगैर पुख्ता  बातों के सिर्फ इसलिए कि क्यूँकि  पश्चिमी मीडिया ने शौर मचाया है कि वे आतंकी हैं उन्हें हमारे लिए आतंकी मान लेना किसी भी तरह उचित न होगा .ध्यान रहे ईराक तेल का बड़ा उत्पादक देश है साथ ही भारत का पारम्परिक मित्र भी रहा है .अगर वहाँ नया शक्ति संतुलन बनता है या सत्ता पर नये लड़ाके काबिज होते हैं तो उन्हें हमारी और हमें उनकी मदद की दरकार रहेगी. उनका विरोध करके हम अपने लिए वैसे ही हालात पैदा कर लेगें जैसे हमने अफगानिस्तान में शिया और सुन्नी लड़ाकों का अनावश्यक विरोध करके पैदा किये थे जब वे अपने देश में सोवियत सेना  के विरुद्ध  युद्ध कर रहे थे .

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