सोमवार, 28 जुलाई 2014

सहारनपुर का दंगा


 सहारनपुर का दंगा दो मिनट में ख़त्म हो सकता है अगर मुफ़्ती फतवा जारी कर दें कि किसी को इबादतगाह बनाने से रोकना गैर इस्लामी है और अकाल तख़्त हुकमनामा जारी कर दे कि स्वर्ण मंदिर की तरह सिख गुरद्वारे की नीव का पहला पत्थर अपने मुस्लिम पड़ौसी से ही रखवायें. लेकिन पहला ज़माना होता तो शायद ऐसा हो भी जाता अब तो सुना है दोनों तरफ से ट्रक भर भरकर हथियार और लड़ाके भेजे जा रहे हैं. वैसे मुझे इस बात का यकीन नहीं है .ये अफवाह ही होगी भला कहीं बाहर से इतने आदमी लड़ने मरने क्यों आयेगें क्या लोगों को अपने घर पर कुछ काम धाम नहीं है

     जिस किसी ने भी भारत का  थोड़ा भी इतिहास पढ़ा है वो इस सच्चाई से जरूर वाकिफ होगा कि भारत में हिन्दू मुस्लिम साम्प्रदायिक उपद्रवाओं को अंग्रेजों ने इसलिए बढ़ावा दिया ताकि वो लम्बे समय तक यहां राज कर सकें .भारत के सत्ता लोलुप नेताओं ने फूट डालो और राज करो का सबक उनसे ही सीखा है.ये बताने की जरुरत नहीं है कि यू पी में जो साम्प्रदायिक उपद्रव हो रहें हैं उसके पीछे सत्ता लोलुप नेताओं का ही हाथ है .हिन्दू मुसलमानों के झगड़े के बल पर अंग्रेज रहे तो अब मुस्लिम और सिखों के सहारनपुर झगड़े के पीछे कौन हैं इसे समझना कोई मुश्किल काम नहीं है. ऐसे लोग न प्रदेश का भला कर रहें हैं और न कौम का .इन दंगों के कारण प्रदेश में निवेशक निवेश करने पीछे हट रहे हैं जिसके कारण प्रदेश का औद्योगिक विकास प्रभावित होगा जिससे नए रोजगारका सृजन भी नहीं होगा.सोचकर बतायें जो लोग आम आदमी की रोजी रोटी के दुश्मन हैं क्या वे  किसी धर्म या कौम के खैरख्वाह हो सकते हैं ?    
                       

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