सोमवार, 11 अगस्त 2014

बैटरी चालित रिक्शा

दिल्ली में सड़क पर पैदल चलता एक बच्चा बैटरी चालित रिक्शे से टकराकर सड़क पर रखी हलवाई की कड़ाही में गिरकर मर गया .हलवाई ने अपनी कड़ाही सड़क पर रखी हुई थी .दूकान में रखी कढ़ाई में तो बच्चा जाकर गिर नहीं सकता था. दुकानदारों के अतिक्रमण के कारण पैदल यात्रियों का सड़क पर चलते वाहनों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त होना आम बात है.लेकिन इसके लिए न तो अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही होती है और न ही वाहन चालकों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही होती है लेकिन इस मामले में गजब की चुस्ती फुर्ती दिखाते हुए रिक्शा चालाक के खिलाफ कार्यवाही ही नहीं की गयी बल्कि सारे रिक्शों का संचालन ही बंद कर दिया गया है .आखिर रिक्शे के मामलें में ही क्यों इतनी फुर्ती दिखाई गयी है दुर्घटना तो सारे वाहनों से होती है? उन्हें क्यों नहीं बंद किया जाता है .सिर्फ इसलिए कि रिक्शा गरीब आदमी का वाहन है ? गरीब ही उसे चलाता है और गरीब ही उससे सफर करता है .कहा जा रहा है कि रिक्शे का रजिस्ट्रेशन नहीं होता है, और ना ही बीमा है . अगर सिर्फ यही बात है तो ये सब लागू किया जाए इससे कौन मना करता है ? बैटरी चालित रिक्शा पेट्रोलियम पदार्थों से उत्पन्न प्रदूषण से बचने और मानव श्रम तथा गरिमा को बचाने का एक अच्छा साधन है लेकिन शायद सरकार को ये स्वीकार नहीं है कि आम आदमी भी सम्मान से आजीविका कमा सके. इसलिए उसने बैटरी चालित रिक्शा पर ही रोक लगा दी है. सरकार के इस जन विरोधी फैसले का बहुत विरोध नहीं हुआ है लेकिन आम आदमी के विरुद्ध सरकार का ये एक कठोर फैसला है. यह पर्यावरण सुरक्षा के लिए भी एक हतोत्साहित करने वाला कदम है . इस फैसले का ख़ास और आम को विरोध करना चाहिए .

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