बुधवार, 20 अगस्त 2014

नदी जोड़ो योजना

         देश में जगह जगह भयंकर  बाढ़ आने की खबरें मिल रहीं हैं .कई  नदियां उफान पर हैं इधर कई नदी बिलकुल सूखी पड़ी हैं ,तालाब पोखर सब सूखे पड़े हैं .हमारे यहाँ ही एक तरफ गंगा नदी है जो उफान पर है दूसरी तरफ काली नदी और हिंडन आदि नदियां हैं जिनमें नाम मात्र का पानी है. काली नदी तो गंदे नाले में तब्दील हो गयी है .अगर उफनाई  नदियों का थोड़ा सा पानी इस नदी में छोड़ दिया जाता तो यह भी जलपूरित होकर साफ़ हो जाती और नदी सी लगने लगती.
  सरकार  ने अपनी योजनाओं  से गाँव गाँव में जो तालाबों का जीर्णोद्धार कराया है और नये तालाबों का निर्माण कराया है वे भी सूखे पड़े हैं.अगर बरसात के मौसम में भी इन तालाबों में पानी नहीं भरा है तो फिर कब भरेगा ? तालाब खोद देने भर से तो जल सरंक्षण न होगा .जल संरक्षण तो तभी हो पायेगा जब हम बरसात के पानी को व्यर्थ बह जाने से रोकेंगे. भाजपा नदी जोड़ो योजना का बहुत प्रचार करती रही है लेकिन केंद्र में सत्तारूढ़ होने के बाद न तो उसके लिए बजट में कोई  प्राविधान किया गया है और न वैसा करने की कोई इच्छा शक्ति दिखाई है.  देश भक्ति का मतलब हिन्दू मुसलमान पाकिस्तान का राग अलापना  भर नहीं है अगर  जल प्रबंधन बेहतर ढंग से किया जाए तो यह भी देशभक्ति कहलाएगी. बल्कि यह सच्ची देशभक्ति होगी क्यूँकि सरंक्षित जल से प्यासों को पानी मिलेगा, किसान खुशहाल होंगे और पूरा देश खुशहाल होगा.      

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें