बुधवार, 6 अगस्त 2014

हायधीश दवे का गीता ज्ञान

   
      सिरफिरे लोग  तो पहले से ही बहुत हैं, कोई डाक्टर है तो कोई प्रोफ़ेसर है, बस एक तुम्हारी ही कमी बाकी थी हायधीश दवे सो तुम भी टपक पड़े. तुम तानाशाह बनना चाहते हो ?बनो. तुम्हारे एक ही बयान ने बता दिया कि तुम सिरफिरे हो जो एक तानाशाह के लिए होना जरूरी है .वरना तानाशाह बनने की बात कहने से पहले ये जरूर सोच लिया होता कि तानाशाह कुत्ते की मौत मरते हैं.जनता उनके मरने पर शोक नहीं मनाती, खुश होती है.
बहरहाल फिलहाल मुझे एक किस्सा याद आ रहा है लो तुम भी सुनो. किस्सा यूँ है कि रमजान का पवित्र महीना था. एक फ़कीर अपने गधे पर सवार होकर रेगिस्तान का सफर तय कर रहा था. नमाज का वक्त हुआ तो फ़कीर ने नमाज पढने के लिए एक साफ़ सी जगह देखकर नमाज पढ़ना तय किया. वो अपने गधे को विश्राम के लिए छोड़कर नमाज पढने लगा . नमाज ख़त्म करने के बाद जब उसने दुआ के लिए हाथ उठाये तो उसने देखा कि उसका कुत्ता और गधा भी आसमान की ओर मुँह करके खुदा से दुआ माँग रहे हैं . उसने सोचा मैं इंसान हूँ और ये जानवर लेकिन ये कितने खुदा परस्त हैं. मुझे इनसे सीख लेनी चाहिए.पहले इनसे मालूम करता हूँ कि ये खुदा से क्या दुआ माँग रहें हैं ? थोड़ी देर बाद जब उसने देखा कि  दोनों अपनी दुआ माँग चुके हैं तो उसने गधे से पूछा तुमने अपने लिए क्या दुआ मांगी है ?
गधे ने जबाब दिया ' मैंने खुदा से कहा है कि ए खुदा तूने इतने सारे गधों को बादशाहत दी है मुझे भी एक मुल्क का बादशाह बना दे.'
फ़कीर को बड़ी हैरत हुई कि गधा बादशाह बनना चाहता है. फिर उसने सोचा इसमें हैरत  कि  क्या बात है अक्सर बादशाह गधे ही होते हैं . फिर उसने कुत्ते से पूछा कि तुमने खुदा से क्या माँगा है ?
कुत्ते न कहा कि 'मैंने अल्लाह ताला से दुआ मांगी है कि जिस मुल्क का  बादशाह गधा हो मुझे उस मुल्क का काजी बना देना.'
यह सुनकर फ़कीर ने अपने दोनों हाथ दुआ के लिए फैला दिए और कहा ओ अल्लाह ताला ओ मेरे परवरदिगार जिस मुल्क में ऐसी हुकूमत हो तू मुझे उस मुल्क में पैदा मत करना.'
तो श्रीमान हुकूमत की पहचान हो रही है.अपने भविष्य का अंदाजा भी होने लगा है . आप गीता के ज्ञान देने की बात न भी करते तब भी हमें पता है कि वह यही बताती है कि 'कर्म किये जा फल की इच्छा मत कर ए इंसान'. क्यों न करें फल की इच्छा ? क्या हमें नहीं पता होना चाहिए  कि  हम कितना काम करेंगे तो कितना फल मिलेगा ?
लेकिन नहीं आप तो चाहेंगे कि मेहनत करने वाले मेहनत करें और फल का निर्धारण वो लोग करें जो स्वयं को भाग्यविधाता  समझते हैं, भगवान समझते हैं. इसीलिए तानाशाह  बनकर सबको गीता पढ़ाना चाहते हैं? पर ये  न होने वाला है हाँ  महाभारत होती हो तो हो जाए .

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