शुक्रवार, 8 अगस्त 2014

पंद्रह अगस्त के दिन भाषण


      पंद्रह  अगस्त नजदीक आ रहा है .मुझे भी एक दो जगह भाषण देना पड़ सकता है .वैसे मुझे भाषण देना आता नहीं है लेकिन पंद्रह अगस्त के दिन भाषण देने को लेकर मैं ख़ासा उत्साहित हूँ . अपने भाषण को लेकर कुछ विचार मेरे मन में आने लगे हैं. मैं सोचता हूँ उन्हें नोट करना शुरू कर दूँ .पंद्रह अगस्त तक ठीक ठाक तालीपीट भाषण तैयार हो जाएगा. वैसे भी ताली नहीं भी कोई पीटेगा तो अंडे और टमाटर भी नहीं फेंक सकेगा क्यूँकि अब इतनी औकात किसी की नहीं है. इसलिए मैंने मजबूत   इरादा   कर   लिया   है कि मैं पंद्रह   अगस्त को भाषण दूँगा.दोस्तों से गुजारिश है कि इस काम में मेरी मदद करें.मैं यूँ सम्बोधित करना चाहता हूँ -

       '' भाईयों और बहिनों आप सबको यही पता है कि पंद्रह अगस्त उन्नीस सौ सैंतालिस को हमारा देश आजाद हुआ है. हाँ भारत पंद्रह अगस्त उन्नीस सौ सैंतालिस को आजाद हुआ है लेकिन हम ये कैसे भूल सकते हैं कि ये खंडित आजादी है? ये आजादी भारत को खंड खंड करके प्राप्त हुई है .इसलिए इस आजादी को, इस खंडित आजादी को हम आजादी नहीं कहते हैं. अब वक्त आ गया है जब हमको इस खंडित आजादी को ख़त्म कर देना है और एक अखंड आजादी को प्राप्त करना है .इसके लिए हम नेपाल से भूटान तक और जर्मनी से ब्राजील तक का सफर करेंगे और जरुरत हुई तो अपनी पगड़ी चीन में उतार कर रख देंगे. बाकी सरहद पर तोपों की सलामी और शहीदों की क़ुरबानी उसी तरह जारी रहेगी जैसे आज से पहले होती रही है.शाल और साड़ियों के आदान प्रदान की बात करना इसलिए ठीक नहीं है क्यूँकि ये जनाना काम हैं. ये अखंड भारत के मार्ग में आड़े आ सकते  हैं. 
           हाँ राष्ट्रवादी लाठियाँ जो दिल्ली की सडकों पर लड़कों पर पूरी दम ख़म से बजाई जा रहीं हैं,और  उम्मीद है उनकी गूँज सरहद के पार तक जरूर पहुँच गयी होगी, उन्हें हमने तेल पिलाकर तैयार कर लिया हैं. न न चीन की तरफ वाली सरहद की बात न करें उधर गूँज कैसे जा सकती हैं. उधर हिमालय पर्वत है. इनकी गूँज उस सरहद की तरफ जाती होगी जिधर सिंधू जाती है, झेलम जाती है ,गंगा बहकर जाती है. सरहद के उस पार वाले जरूर लाठियों की धमक से काँप रहें होंगे और वो जल्द ही अखंड भारत में शामिल होने का ऐलान कर देंगे. नहीं तो फिर हमारी नेकरिया पलटन लाठियाँ उठाकर अखंड भारत बनाने के लिए कूच करेगी. आओ आज के दिन हम ये शपथ लें कि हम सब लाठी चलायेंगे और नेकरियां पलटन में शामिल होकर भारत अखंड बनायेंगे. वन्दे एए मातरम.''

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