शनिवार, 6 सितंबर 2014

नेता वक्तव्य

किसी नेता के किसी वक्तव्य पर कुछ टिपण्णी करने का मन नहीं करता है लेकिन कुछ तो उनके वक्तव्य ऐसे होते हैं कि कुछ कहे बिना रहा नहीं जाता है और कुछ उनके समर्थक इतने बेशर्म होते हैं कि विरोध करना ही पड़ता है .अब देखिये माननीय प्रधान मंत्री नरेद्र मोदी जी शिक्षक दिवस पर कितना साफ़ बोल रहे हैं कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे  तो थोडा ऐसा वैसा भी बोल लेते थे लेकिन जब से प्रधान मंत्री बने हैं उन्हें बहुत सोच समझकर बोलना पड़ता है कि कहीं उनके कुछ बोलने से देश का कुछ नुकसान न हो जाए . अब मोदी जी इतना साफ़ बोल रहे हैं कि एक राज्य का मुख्य मंत्री कुछ भी बोल सकता है देश जहान में चाहे जो होता रहे. क्या किसी राजनेता को इतना गैर जिम्मेदार होना चाहिए कि वो राष्ट्रहित जनहित का ध्यान किये बगैर कुछ भी बक दे ? दुर्भाग्य से हमारे राजनेता ऐसा ही करते रहें हैं .वो  राष्ट्रहित को नहीं अपने वोट बैंक को ध्यान में रखते हैं राष्ट्र उनके लिए दोयम दर्जे पर है .
  अब प्रधानमंत्री जी के वक्तव्य के दूसरे हिस्से पर आते हैं . प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि जब से वो प्रधानमंत्री बने हैं उन्हें ध्यान रखना पड़ता है कि कहीं वो कुछ ऐसा न बोल दें जिससे देश का नुकसान हो . यह अच्छी बात है कि हमारे प्रधान मंत्री देश के मान सम्मान के प्रति इतने सचेत हैं .लेकिन अभी दो दिन पहले का ही उनका जापान में गीता भेंट करते हुए दिया गया वक्तव्य इसकी पुष्टि नहीं करता है .उनहोंने वहाँ कहा कि वे गीता भेंट कर रहे हैं जिसके लिए भारत के सेकुलर लोग उनकी आलोचना करेंगे . मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या वे सारे भारत के लोगों के प्रधानमंत्री नहीं हैं ? क्या देश के सेकुलर लोगों को वो अलग थलग करना चाहते हैं वो भी जापान में जाकर ? क्या वो भारत के संविधान जिसकी प्रस्तावना में ही भारत को धर्म निरपेक्ष समाजवादी और लोकतांत्रिक देश घोषित  किया गया है का जापान में मजाक उडा सकते हैं ? हमें अपने संविधान के सेकुलर स्वरुप पर गर्व है और स्वयं के सेकुलर होने पर अभिमान भी .जब तक हमारा संविधान धर्म निरपेक्ष समाजवादी और लोकतांत्रिक देश होने की गारंटी देता है तब तक आप ऐसा नहीं बोल सकते हैं .पहले भारत के संविधान से धर्म निरपेक्ष समाजवादी और लोकतांत्रिक देश होने का पैर हटाईये तब हमारा मजाक बना सकते हैं उससे पहले आपको ऐसा कोई हक़ नहीं है माननीय प्रधान मंत्री जी .

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