गुरुवार, 2 अक्तूबर 2014

खींची खूब लंगोटी .

महात्मा गाँधी सारे जीवन स्वदेशी अपनाओ कहते रहे  और उनके   नये उपासक सारी दुनिया में घूम घूम कर विदेशी कंपनियों को भारतीय श्रम सम्पदा की लूट के लिए आमंत्रित करने में जुटे हैं . गाँधी के स्वच्छता प्रेम की हंसी उड़ाने के लिए पहले से ही  भली भाँति स्वच्छ  किये गए स्थानों को स्वच्छ करने की नौटंकी कर रहे हैं. बस यूँ जान लो -
गाँधी को भी पूज रहें हैं गाँधी के हत्यारे
जब गोली से नहीं मरे वो पूज पूज कर मारे
इसीलिए स्वदेशी इनके लिए सिर्फ नारा है
गाँधी के हे राम से ज्यादा श्रीराम प्यारा है
नंगे बदन फाकीर  की अब तक खींची खूब लंगोटी .


0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें