सोमवार, 13 अक्तूबर 2014

नोबुल पुरस्कार :भारत और पाकिस्तान में लोगों को परेशानी

शान्ति के नोबुल पुरस्कार से भारत और पाकिस्तान में बहुत लोगों को परेशानी में डाल दिया है. पाकिस्तान में लोग इसलिए परेशान हैं कि मलाला को क्यों दिया ? और भारत में इसलिए हैरान हैं कि कैलाश सत्यार्थी को कैसे दे दिया ? शुक्र है कि नोबुल पुरस्कार कमिटी  में इन दोनों देशों की ज्यादा  सुनी नहीं जाती है वरना दुनिया में चाहे  जिसे ये पुरस्कार दे दिया जाता इन दोनों को तो हरगिज नहीं देने दिया दिया जाता . भारत में बहुत सारे छिद्रान्वेषी कैलाश सत्यार्थी के यथार्थ की खोज में निकल चुके हैं. कुछ दिनों  में ही वे उसके यथार्थ पर  ही नहीं उसके सत्यार्थ पर भी प्रकाश डालते हुए नजर आयेगें. उन्हें उनके पुरुषार्थ से कोई मतलब नहीं है उसके निहितार्थ बल्कि सीधे कहें तो मात्र अर्थ (वित्त)पर शास्त्रार्थ करना है .वे साबित करेंगे कि ये एन जी ओ विदेशी पैसा खाने वाले परजीवी हैं और श्रमजीवियों की एकता को तोड़ने के लिए पूँजी  के पुरोधाओं ने पाले पोसें हैं.
 जरा पता तो करो ऐसी लफ्फाजी करने वाले कितने लोग खुद एन जी ओ के लिए काम कर रहे हैं ? हाथ ऊंचे कर कर के 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा लगाने  वाले कब झंडा डंडा पीछे चलने वाले कार्यकर्ता को थमाकर एन जी ओ बन गए इसका कच्चा चिटठा भी अब खोल ही देना  चाहिए.          

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