रविवार, 30 नवंबर 2014

जनवादी लेखक संघ की मेरठ इकाई का जिला सम्मेलन[मेरठ 30नव० 2014 ]



जनवादी  लेखक  संघ  की  मेरठ  इकाई द्वारा आयोजित '' साहित्यकारों के सरोकार और  वर्तमान दौर   में लेखकों  का दायित्व '' विषय पर बोलते हुए जलेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंचल चौहान ने कहा कि आदि कवि वाल्मीकि से लेकर नागार्जुन और मुक्तिबोध तक हर जागरूक लेखक  अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाता रहा है .जब व्याध मिथुनरत क्रोंच  पक्षी युगल में से एक का  वध  कर देता है तो ऋषि वाल्मीकि वो पहला कवि है जिसने इस अमानवीय  व्यवहार और क्रूरता  के विरुद्ध आवाज उठायी .वह उन पक्षियों के दर्द को स्वर ही नहीं दे रहे होते वस्तुत: वो बेजुबान  के हक़ में जन भावनाओं को जाग्रत कर रहे होते हैं . वह साहित्य और संवेदना ही हमारी थाती है .आज भी अन्याय और शोषण के विरुद्ध जो जनता की आवाज बुलंद कर रहें हैं वो जनवादी लेखक ही हैं और यही हम लेखकों का दायित्व है और वस्तुत यही सच्चा साहित्य है .
कार्यक्रम  के मुख्य अतिथि वक्ता जलेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रख्यात साहित्यकार विष्णु नागर ने अपने सम्बोधन में कहा कि आम आदमी की भाषा में रचे गए साहित्य के साथ साथ विशिष्ट स्तरीय साहित्य के महत्व का भी अपना महत्व है .उन्होने कहा  कि जनवादी साहित्य दोनों ही भाषा में हो सकता है और होना भी चाहिए .साहित्य का कला पक्ष उत्कृष्ट  होने का मतलन जनता से दूर हो जाना नहीं है. प्रत्येक स्थिति  में आम जनता के दुख दर्द को स्वर देना तथा अन्यायी सत्ता के विरुद्ध खड़े होना साहित्यकार का दायित्व है.उन्होंने ये भी कहा कि  जनता का भी यह दायित्व है कि वह साहित्यकारों को समुचित मान सम्मान और आजीविका के संसाधन उलपब्ध कराये .

 जलेस के राष्ट्रीय उप सचिव डा संजीव कुमार ने कहा कि विश्व साहित्य के अध्ययन से हम यह समझ सकते हैं कि प्रत्येक देश के साहित्यकारों ने जन संघर्षों के नेतृत्व करने में आगे बढ़ककर अपनी हिस्सेदारी निभायी है .साहित्य में जनवादी विचारधारा का आज भी वर्चस्व है .उन्होंने कहा कि तमाम प्रतिगामी ताकतों के एकजुट होकर काम करने के बावजूद वो कभी जनवादी साहित्यकारों को वैचारिक संघर्ष में चुनौती नहीं दे पाये हैं.उन्होंने कहा कि जनवादी मूल्यों को आज पहले से ज्यादा बड़ा खतरा है और जरुरत इस बात की है कि तमाम जनपक्षधर   साहित्यकार संगठित होकर फासीवादी ताकतों का मुकाबला करें .
 कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अंगरेजी साहित्य के वरिष्ठ  व्याख्याता डा०ओ एस गुप्ता ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण भी है और निर्माता भी है .साहित्यकार समाज में घट रही घटनाओं को अपनी पैनी दृष्टि और तीव्र संवेदना से देख परखकर साहित्य रचता है और समाज में बदलाव का वह मार्ग दिखाता है जिस पर  चलकर राष्ट्र के नीति निर्माता, क़ानूनविद और समाज सुधारक समाज में बदलाव के लिए काम करते हैं .आज भी साहित्यकारों को उसी युगांतकारी भूमिका को निभाना है जिसे प्रेमचंद ने निभाया, जिसे फैज अहमद फैज ने निभाया तथा जिसे काजी नजरूल इस्लाम ने निभाया था .


  इस अवसर पर फेस बुक पर के हमारी आवाज समूह के एडमिन श्री दीपक गर्ग ने सोनीपत से पधारकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना विशिष्ट योगदान दिया जिसके लिए जलेस मेरठ की जिला इकाई ने उनका विशेष आभार प्रकट किया .जलेस मेरठ के सम्मेलन  में हिसार में अभियुक्त रामपाल के अड्डे पर पत्रकारों पर किये गए पुलिसिया जुल्म की जम कर भर्त्सना की गयी और प्रस्ताव पारित किया गया कि सरकार दोषियों  के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही करे .  
कार्यक्रम के अंत में  जलेस मेरठ की नयी जिला कार्यकारिणी का चुनाव किया गया. कहानीकार श्री निर्मल गुप्त अध्यक्ष,प्रो०श्री राजेन्द्र जुआल उपाध्यक्ष,एडवोकेट श्री मुनेश त्यागी सचिव तथा  कवि श्री ब्रजपाल ब्रज  उपसचिव एवं कवि श्री विजय गुप्त कोषाध्यक्ष चुने गए  .जलेस मेरठ के पूर्व अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र अबोध, अमरनाथ मधुर एवं धर्मवीर कटौच  को  कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित घोषित किया गया . कार्यक्रम की अध्यक्षता डा० ओ एस गुप्ता ने की और संचालन जिला सचिव श्री मुनेश त्यागी ने किया.        

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