मंगलवार, 18 नवंबर 2014

सतलोक के रामपाल

हरियाणा   सरकार  ने  कोर्ट  से कहा    कि   वह   संत   रामपाल   की गिरप्तारी के लिए मासूम बच्चों और औरतों को  चोट  नहीं पहुंचाएगी .उसने संत रामपाल से कोर्ट के समक्ष पेश होने की अपील की है . ज्ञात हो कि रामपाल को गिरपतारी  से बचाने के लिए हजारों  लोग  उनके सतलोक  आश्रम  का  घेरा डाले हुए  हैं .संत रामपाल ने कई हजार ब्लैक  कैट  कमांडों  भी  अपनी  सुरक्षा में    तैनात    कर    दिए    हैं .
गौर   तलब    है कि कथित  संत रामपाल हत्यारोपी    है और उसकी     गिरप्तारी के लिए कोर्ट ने वारंट   जारी   किया  हुआ  है .पेशी  से बचने  के लिए संत रामपाल अपने भक्तों  को ढाल  बनाये  हुए  है तथा  भक्तगण  भी  पूरी  मुस्तैदी  से उसकी  हिफाजत  में जुटे  हैं .
एक  अजीब  दृश्य  है जहाँ   एक तरफ़ सरकार के   पचास हजार जवान ड्रोन हवाई जहाज समेत तमाम  भारी भरकम सुरक्षा करके  संत रामपाल को गिरप्तार करने के लिए घेरा डाले हैं वहीँ उनके भक्त अपने बीवी बच्चों के साथ संत रामपाल को बचाने के लिए अपने जीवन को दांव पर लगाए हैं .
     अब कोई सरकार चाहे कोर्ट ही क्यूँ ना कहे आम जनता पर तो गोली नहीं चलाएगी,फिर जिससे सरकार ने अभी चुनाव में मदद ली   हो उसके   खिलाफ   कोई कार्यवाही   कैसे   कर सकती   है ? हाँ   कार्यवाही   करने का दिखावा  जरूर  किया जा सकता है वरना जब   सरकार भिंडरवाला   को पकड़ने   के लिए स्वर्ण मंदिर में सेना भेज  सकती  है तो संत रामपाल तो क्या चीज  है ?
    क्या ही अच्छा हो कि सरकार संत रामपाल के भक्तों की भावना का आदर करे और घोषणा कर दे कि जो भी संत रामपाल का भक्त हो वो उसकी सुरक्षा के लिए आ सकता है सरकार कुछ नहीं करेगी बल्कि उन्हें पूरी सुरक्षा प्रदान करेगी बस उन्हें वापिस नहीं लौटने देगी .भक्तगण चौबीस घंटें वहीँ रहें  और भक्ति करें .सरकार जाने वालोंको सख्ती से रोक दे और आने वालों को सम्मान से आने दे .देखें  कितने  दिन  भक्त गण उसकी सेवा  सुरक्षा में रहते  हैं ?
 किसी   आदमी   को एक रात   भी घर   से बाहर   रहना   पड़   जाए  तो उसे  दस  चिताएं  सताने  लगती  हैं किसी  को भैंस  के दूध  न  देने  की चिंता  होती है किसी  को घर  पर बच्चों के अकेला  होने की चिंता  होती है किसी  की  गन्ने की कटाई रुक जाती  है किसी  का खेत  बोने  से रह जाता  है .किसी  को दूकान  की फ़िक्र होती है किसी  को मकान की फ़िक्र होती है और यहां है कि भक्त गण सब कुछ त्याग कर संत की सुरक्षा के लिए ऐसे चिंतित हैं जैसे अमेरिका सद्दाम हुसैन को पकड़ कर ले जा रहा हो जिसे वो कोर्ट में सुनवाई का नाटक कर फांसी पर लटकाकर ही रहेगा .
 भक्त शायद ये भूल रहे हैं कि ये भारत है अमेरिका नहीं है .जहाँ किसी गरीब और असहाय को तो बिना समुचित  जाँच और सुनवाई के सजा हो सकती है लेकिन किसी रसूखदार का बाल बांका नहीं हो सकता है .संत रामपाल अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए मीडिया में काफी प्रचार पा  चुके हैं. बाकी रही सही कसर कोर्ट में पेश होने पर पूरी हो जायेगी .अब वो ज़माना आ गया है जब इन संतों महंतों के आगे सरकारें दंडवत होंगी और कोर्ट टुकुर टुकुर  देखा करेगा .

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें