शनिवार, 22 नवंबर 2014

पत्रकारों की पिटाई


जरायम पाल  के अड्डे पर पुलिस  ने  पत्रकारों को जम कर पीटा. कई पत्रकार बुरी तरह चोटिल हो गए जिसमें एन डी टी वी के रिपोर्टर भी हैं. लेकिन एन डी टी वी के अलावा बाकी किसी टी वी चैनल  ने इस  सरकारी जुल्मों सितम के खिलाफ कुछ ख़ास आवाज नहीं उठायी है .अनेक  चैनल तो अभी भी मोदी  राग  गाने  में ही मस्त  हैं .
  कहते हैं आजाद  भारत में यह पत्रकारों पर सबसे बड़ा  संगठित हमला है जिसका उद्देश्य  यही  है कि स्वतंत्र पत्रकारिता  सत्ता  की ताबेदारी  कबूल  कर लेऔर ये अच्छी तरह समझ ले कि उसे सिर्फ वही  दिखाना है जिसे सत्ता चाहती है .एन डी टी वी  ने अपनी आवाज को ओर बुलंद  करते हुए घायल पत्रकारों  को प्राइम  टाइम  में दिखाया  और एंकर  रवीश कुमार ने  भावुक होकर जनता  से  पत्रकारों की पिटाई का विरोध  करने  की अपील  भी इस अनुरोध के साथ  की कि यदि आम जनता  आज  खामोश  रहेगी  तो उसकी  आवाज उठाने वाला कोई नहीं होगा.
  इस मुद्दे  पर सोशल  मीडिया या तो खामोश है या  मन ही मन मुख्यधारा की मीडिया की दुर्गति  पर यह सोचकर खुश है कि अब यह मीडिया  साहबों, सेठों और कारोबारियों की रखैल से ज्यादा कुछ नहीं है. अब  अगर रखैल [ मुझे इस अभद्र शब्द के इस्तेमाल के लिए क्षमा किया जाए ] पिटती है तो बस्ती वाले क्यूँकर खुश न होगें ? इस छिनाल ने [ मुझे फिर क्षमा किया जाए ] ने  अच्छे भलों का भी विश्वाश उड़ा दिया है.
   खैर ये शिकायत अपनी जगह बिलकुल सही है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि एक सिरे से सबको बेड़ियां पहना  दी जाएँ .इसलिए इस दमन के खिलाफ तो आवाज उठानी ही होगी. माना टी वी चैनल के अनेक मठाधीश पत्रकार हैं जिनकी करोड़ों अरबों  की संपत्ति इसी धंधें से  है लेकिन ये देखने का काम आय कर विभाग का भी है. वो देख सकता है कि इनके पास आय से ज्यादा सम्पत्ति कहाँ से आई है ? लेकिन ये बात जान  लो कि अगर आज पत्रकारों की ठुकाई पिटाई पर सोशल मीडिया खामोश रहती है तो वह दिन ज्यादा दूर नहीं है जब फेस बुक पर लिखने वाले भी पकड़ पकड़ पीटें जायेगें और आप कहीं कोई शिकायत नहीं कर पाएंगे.   जर्मन कवि मार्टिन नीमोलर की कविता को याद करें 
'पहले  वे यहूदियों  को मारने के लिए आये 
मैं  चुप  रहा  क्यूँकि  मैं  यहूदी   नहीं था .
फिर वे कम्युनिष्टों   के लिए आये 
और  मैं  चुप  रहा  क्यूंकि  मैं  कम्युनिष्ट  नहीं था  
.......फिर वे मेरे लिए आये तो मेरे लिए बोलने वाला कोई न था . 
     सुरक्षित    रहने    के लिए खामोश रहना    अच्छा    तो है लेकिन   ज्यादा  खामोशी     भी   अच्छी नहीं  है .      

1 टिप्पणी:

  1. agree with you .vastav me patrkaron kee pitaai prajatantr par prahar hai aur iska khuleaam virodh hona hi chahiye .

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