बुधवार, 17 दिसंबर 2014

'बदले की कोई माँग नहीं,कठमुल्ला राज बदलना है'

बच्चों ने किताबें थामी हैं, एक दुनिया नयी बनाने को
सतरंगी सपने बुनने को कुछ गीत ख़ुशी के गाने को.

हँसियों के सुर्ख सवेरे से, दहशत का अंधेंरा का डरता है
डरते हैं मौत के सौदागर, कमजर्फ लुटेरा डरता है .

ये देखो उनका डर देखो बच्चों को डराने आये हैं
वो कलम किताबों से डरकर स्कूल उड़ाने  आये हैं

आ जाओ ओ दहशतगर्दो कारबाइन बंदूकें लेकर
बच्चें भी सीना तानें हैं अपनी सारी दहशत खोकर.

ये कर्म क्षेत्र,ये धर्म क्षेत्र, बन रहा आज जो युद्ध क्षेत्र,
इस में शहीद जो बच्चे हैं, उनको है नमन नत सजल नेत्र.

वे सच्चे वीर बहादुर हैं, बंदूकों वाले डरते हैं,
वे समां गए जनगण मन में ऐसे यौद्धा कब मरते हैं?

मारें जाएंगे कठमुल्ला,सब जेहादी, तालिबानी.
इराकी,अफगानी हो या फिर हो कोई पाकिस्तानी .

हम खींच खींच कर मारेंगे,सब गहरी घनी गुफाओं से,
उनको आका की गोदी से,दहशत के बड़े खुदाओं  से.

हाँ देखेगें हम जालिम की,अब कौन हिमायत करता है?
इन मासूमों के बाजू में,अपने बच्चों को रखता है.

बदले की कोई माँग नहीं, दहशत का राज बदलना है,
ये लम्बी दाड़ी,टोपी का, कठमुल्ला साज बदलना है.

बदलेगें सड़े रिवाजों को एक दुनिया नयी बनाएंगे
इंसानों को इंसानों का जीवन वापिस लौटायगें . 

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