सोमवार, 8 दिसंबर 2014

राष्ट्रीय पुस्तक गीता क्यों न हो ?'

'जिस तरह पाकिस्तान, सऊदी अरब की राष्ट्रीय पुस्तक कुरान है उसी तरह भारत की गीता क्यों न हो ?'

इसलिए  नहीं  होनी चाहिए  क्योंकि  भारत धर्म निरक्षेप देश है जबकि  पाकिस्तान  और सऊदी  अरब  धार्मिक देश हैं इसलिए  वे  अपनी  धार्मिक किताब  कुरआन  को  राष्ट्रीय  पुस्तक घोषित कर सकते हैं और राष्ट्रिय  सम्मान   के  साथ  जो  आचार  व्यवहार  वाजिब है वैसा न  करने वाले  को   दण्डित  करते   है .
 क्या भारत एक धार्मिक देश है ? क्या  आप  गीता  को  धार्मिक पुस्तक मानते हैं ? क्या आप चाहते हैं कि यहाँ भी किसी पुस्तक के अपमान के लिए दंड मिले ? क्या यह उचित होगा कि वेद ,रामायण ,महाभारत ,मनु स्मृति को राष्ट्रीय ग्रन्थ न माना जाए ? क्या अन्य भाषा भाषी अपनी किताब को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किये जाने की मांग न करेगें ?
यह कुछ नहीं काले धन की वापसी और अन्य चुनावी वायदों को पूरा करने में असफल होने पर नए विवादों को पैदा कर जनता का ध्यान भटकाना मात्र है . इनसे पूछों क्या गीता को राष्ट्रीय पुस्तक घोषित करने के वायदे पर जनता से वोट ली थी या विकास के मुद्दे पर वोट माँगी थी ? क्या इसे विकास कहते हैं कि एक ऐसी किताब  को राष्टीय ग्रन्थ घोषित कर दिया जाए जो कहती है कि 'उठो युद्ध करो जिन्दा रहे तो राज  करोगे और अगर मर गए तो स्वर्ग भोगोगे.'
    कहीं भी यह नहीं लिखा है कि जिन पर राज किया जाएगा उन्हें क्या मिलेगा ? जो तुम्हारी राज्य लिप्सा  की भेंट चढ़ेंगे उन्हें  क्या मिलेगा ?
         हम जैसे किसी पुस्तक पर प्रतिबन्ध  पसंद  नहीं करते हैं  उसी   तरह   किसी पुस्तक  को तरजीह देकर उसे राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाना  भी नापसंद   करते हैं .हाँ अगर फिर भी ऐसा करना चाहते हैं तो करें पर जनता को उसे पढने लायक शिक्षित तो करें .
 हमने बिना राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किये भी इसे पढ़ा है लेकिन आप इसे पढने के लिए नहीं पूजने के लिए राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित कर रहें हैं वरना जनता को शिक्षित करने की बात कहते .आज आप गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ बनायेंगे और  फिर कल  आप इससे अनजान आदमी को वैसे ही दण्डित करेगें  जैसे कुरआन के अपमान के लिए इस्लामी देश करते हैं .
   क्या आप भारत को ऐसा ही देश बनाना चाहते हैं जैसा पाकिस्तान या सऊदी अरब है ?

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