बुधवार, 24 दिसंबर 2014

अलाव

भयानक ठण्ड पड़ रही है. बेघर लोगों की जान पर बन आई है. लेकिन कहीं से भी सरकार की तरफ से अलाव जलाने की खबर नहीं है, जिसके सहारे बेघरबार वाले अपनी रात गुजारते हैं .शायद सरकार ने भी मान लिया है कि जब तक संघ परिवार के कार्यकर्ता कभी गीता ,कभी संस्कृत, कभी धर्मांतरण और कभी लव जेहाद को लेकर माहौल को गर्म करते रहेंगे तब तक लोगों के खून में गर्मी पैदा होती रहेगी. इसलिए उन्हें ठण्ड नहीं सताएगी. ऐसे में अलाव पर खर्च करने की क्या जरुरत है ? वैसे भी अब ये कोई सरकारों के करने का काम थोड़े ही है .सरकारों का काम है विश्व की सबसे ऊंची मूर्ती का निर्माण करना .सरकारों का काम है भारत रत्न के तमगे बाँटना. सरकारों का काम है समाज को हिन्दू मुस्लिम में बाँटना .इसलिए जो काम सरकारों के करने का है वो कर रही है .अब अगर आप ये चाहते हैं कि सरकार आपको ठण्ड से बचाने का भी इंतजाम करे तो इतना तुच्छ काम सरकार नहीं करेगी ये इहलोक के काम हैं जो आपको खुद करने पड़ेंगे. सरकार आपका परलोक सुधारने का काम करने वाली है .आपकी मूल धर्म में वापसी करेगी ताकि आप सहूलियत से स्वर्ग सिधार सकें .
क्या कहा ये स्थानीय प्रशासन का काम है ? और केंद्र सरकार का काम क्या है? हर वक्त हवा हवाई बातें बनाना ? अगर बातें बनाने से जनता का भला हो जाता तो ये काम तो सदियों से हमारे धर्मोपदेशक कर ही रहें हैं .क्या सरकार भी यही काम करना चाहती है ?

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