शनिवार, 5 सितंबर 2015

चांसलर एमएम कलबुर्गी

पता करो तालिबानों का घर ढूॅंढों शैतानों का
छुपे हुये जिस मॉंद में बैठे खोलो राज ठिकानों का|
नहीं कलम के सभी सिपाही बन्दूकों से डरते हैं
मरते हैं एक बार बहादुर बुजदिल रोज ही मरते हैं।

    प्रगतिशील विचारक और कर्नाटक में हम्पी यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर एमएम कलबुर्गी की आज सुबह कल्याणनगर स्थित उनके आवास पर कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। कलबुर्गी भी वर्ष 2013 में मारे गए नरेंद्र दाभोलकर की तरह लंबे अरसे से धार्मिक आडंबर और अंधविश्‍वास का विरोध कर रहे थे। 

     धारवाड़ के पुलिस कमिश्नर रवींद्र प्रसाद ने कहा, डॉ कलबुर्गी की सुबह 8रू40 बजे धारवाड़ के कल्याणनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रसाद ने बताया कि 77 साल के कलबुर्गी ने जैसे ही घर का दरवाजा खोला, हमलावरों ने उनकी आंखों के बीच में गोली दाग दी। गोली मारने के बाद हत्‍यारा बड़े आराम से एक बाइक पर बैठकर भाग गया। कलबुर्गी को तुरंत नजदीक के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। यह पूछे जाने पर कि उन्हें कितनी गोलियां लगीं और हमले के पीछे कौन थे, पुलिस ने कहा कि अभी विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। 

      कलबुर्गी एक जाने-माने विद्वान और शोधकर्ता थे, जो धार्मिक, सामाजिक और अन्य मुद्दों पर अपनी टिप्पणियों के लिए कई बार विवादों में रहे। बजरंग दल, विश्‍व हिंदू परिषद और श्री राम सेना जैसे हिंदूवादी संगठन प्रो. कलबुर्गी के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्हें केंद्रीय और राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका था। धमकियों के मद्देनजर उन्‍हें पुलिस सुरक्षा भी मुहैया कराई गई थी लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसवालों को तीन महीने उनके अनुरोध पर ही हटाया गया था।

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