शनिवार, 5 सितंबर 2015

कौन लडेगा भीषण रण ?


द्रोणाचार्य पुरस्कारों से सम्मानित हैं शिक्षक गण
एकलव्य खुश होता है पाकर अपंग का आरक्षण।
उत्पीडक हर्षित,पीडित को नहीं शिकायत है कोई
आज व्यवस्था परिवर्तन का कौन लडेगा भीषण रण ?

अब भी कुछ बूढे दधीचि अस्थियॉं बचायें बैठे हैं
घोर हताशा अन्धकार में ज्योत जगाये बैठे हैं।
उठो एकलव्यों समाज में समता स्वयं ही लाना है
त्याग आस्था स्वयं हमें अस्थि का वज्र बनाना है।

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