शनिवार, 17 अक्तूबर 2015

1

जो जख्म दिल पे दिल के लगाने से लगे हैं, 
वो जख्म भला कब किसी मरहम से भरेंगे ? 
ऐलान है फिर भी यही दीवाने का देखो, 
चाहा है जिसे उस पे ही ताउम्र मरेगें .


2

कुछ चरवाहे का कसूर था या भेडों की नादानी
चरवाहें को छोड के भेडें चली कसाई के पीछे।
यही परेशानी बुधवा की जुम्मन का भी दर्द यही
कैसे आँख मिलायें अपनी बैठे ऑंख शीश किये नीचे।


3

नफ़रत के कायदे को कुछ ऐसे निभाते हैं 
रावण को जलाते हैं बच्चों को जलाते हैं .
दुनिया से निराली ये संस्कृति हमारी है, 
झूठों को जलाते हैं सच्चों को जलाते हैं .


4

मैं जिसे मिस कर रहा हूॅं मिस से मैडम हो गयी
उम्र भी तो ना रही जो ढूॅंढते हम भी नई .
कौन अब हमको मिलेगा उम्र के इस मोड पर ?
जब उमर थी,सोचते मिल जाती हमको भी कई .


5

तू किसी और से बातों में है मशगूल अभी 
और मैं हूँ जो तुझे याद किये जाता हूँ .
मैंने एक उम्र गंवाई है तेरी चाहत में 
आज भी तुझसे मैं उम्मीद किये जाता हूँ .

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