बुधवार, 18 नवंबर 2015

पेरिस पर आतंकवादी हमला


आप सोये हुए शहरियों पर रात के अन्धेरें में आसमान से बम बरसाकर भाग आयें तो आप शान्ति के अलम्बरदार हैं हाँ कोई अपने बदन से बम बांधकर आपकी बस्ती में मरने मारने पहुँच जाए तो वो आतंकवादी है ? तब आप मारे गए लोगों और चीख पुकार मचाते घायलों की तस्वीरें दिखाते नहीं थकते हैं लेकिन जो आपके बमवर्षको की बमबारी से मारे जाते हैं, वो आदमजात नहीं मक्खी मच्छर हैं जो जहां जाते हैं बीमारी फैलाते हैं,जिनका मारा जाना जायज है?
जब तक आदमी की जान और सम्मान को बराबर नहीं माना जायेगा तब तक इन्शानियत को शर्मिंदा करने वाला ऐसा खूनी मंजर दिखता रहेगा .इसके जिम्मेदार आप ही हैं कोई और नहीं है .आपकी मानवता विरोधी सोच आपके दुश्मनों को ही नहीं आपको भी तबाह कर देगी. जियो और जीने दो को मानने से मानव सुखी होगा और कोई भी राह उसे विनाश की ओर ही ले जायेगी .
उम्मीद है तुम ये बात समझोगे तो जरूर लेकिन शायद तब समझोगे जब समझने का कोई अर्थ नहीं रह जायेगा.



          पेरिस में हुए आतंकवादी हमले की भयानकता को मध्य पूर्व में हो रहे नरसंहार का जिक्र कर कम नहीं आँका जाना चाहिए. हर हत्या अपराध है वो चाहे किसी देश की फौज कराती हो या कुछ संगठित गिरोह . फ्रांस पर हुए हमले का दर्द इसलिए भी ज्यादा है कि फ्रांस ने कला संस्कृति साहित्य और दर्शन के क्षेत्र में दुनिया को बहुत कुछ ऐसा दिया है जिस पर हमें नाज है .संभवत: वह दुनिया का सबसे उदारवादी समाज है जो दुनिया के सब इंसानों को बराबरी का दर्ज देता है. वह अंग्रेजों की तरह न तो चालाक बनिया है और न ही अमेरिका का पिछलग्गू है .ये अलग बात है कि किन्तु परन्तु करते हुए वो भी अमेरिका के साथ खड़े होता है लेकिन वो ब्रिटेन नहीं है जो अमेरिका के साथ अमेरिका से आगे दिखाई देता है . 
दूसरी बात ये की ये सच है कि मध्य पूर्व के देशों में हिंसा के लिए काफी हद तक पश्चिमी राष्ट्र जिम्मेदार हैं लेकिन ये भी सच है कि हिंसा ग्रस्त क्षेत्रों के नागरिकों को शरण देने में यूरोपीय देशों कि जनता ने काफी उदारता भी दिखाई है और अपने देशों कि सरकारों पर शरणार्थियों को मदद करने के लिए दबाव बनाया है .
वस्तुत: यह मजहबी और मुनाफे के कारोबारियों का युद्ध है जिसमें बेबस जनता पर जुल्म ढाया जा रहा है .ये बात बार बार साबित हो रही है कि धर्मान्धता अफीम है और पूंजीवाद जनता का खून पीने वाली जोंक है. इनसे निजात पाये बिना मनुष्य का भला होने वाला नहीं है . इन दोनों को ढोते रहने से मानव की कमर टूट जायेगी.

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