गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

सबका साथ सबका विकास

















    एक थे कनिया बाबा.कहते थे सारे भ्रष्टाचारियों को जेल भिजवाएंगे और विदेशों में जमा काल धन वापिस लाएंगे. आज शायद उन्हें अपनी एकमात्र आँख से भी दिखाई देना बंद हो गया है .अगर दिखाई देता तो वो ये जरूर देखते कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध युद्ध लड़ने वाले यौद्धा कीर्ति आजाद को 'न खाऊंगा ना खाने दूँगा' का ऐलान  करने वालों ने धक्के मार मार कर घर से बेघर कर दिया है और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा अरुण जेटली जिसकी अरुणाई भ्रष्टाचार के  पाले से पीली पड गई है और जिसकी केतली चुनाव में पहले ही फूट गयी थी वो अरुण जेटली आज अपनी फूटी केतली लिए चाय वाले के बगल में बैठकर भारत के विकास  की रीति नीति तय करने में जुटा है .क्या  यही सबका साथ सबका  विकास है ?
      विडम्बना देखिये जिसे  भारत की जनता ने चुनाव में खारिज कर दिया उसे भारत के विकास की दिशा देने की जिम्मेदारी दी गयी है .उसकी समझ सिर्फ इतनी है कि वह ये जानता है कि किस प्रकार अरबपति लोग करोड़ों अरबों कमा सकते हैं . अब ये पैसा कोई पेड़ से तो झड़ता नहीं है न ही ये उनके विदेशी खातों में जमा काले धन से आता है उसमें तो जाकर और जमा हो जाता है .ये पैसा आता है देश की आम जनता की जेब से. देश की आम जनता की जेब  ये बरसों से तरह तरह से तराश  रहे हैं . कभी कोई सेस लगाकर कभी बिजली पानी  जैसी जरूरी  चीजों के बेहिसाब दाम बढ़ाकर .आम आदमी पार्टी और कीर्ति आजाद ने इस बेईमानी के खिलाफ बोलने की थोड़ी सी हिम्मत की है किन्तु भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का दावा करने वाली सरकार उस आवाज का गला घोटने पर उतारू है. लेकिन जैसे चीजें दबाने पर फ़ैल जाती हैं उसी प्रकार भ्रष्टाचार  के विरुद्ध उठी ये आवाज भी अब आजाद होकर फ़ैल जायेगी. इसकी कीर्ति, इसकी शोहरत जिसे गुम करने की कौशिश की गयी है और भी ज्यादा फैलेगी. भ्रष्टाचार और काले धन के विरुद्ध  जंतर मंतर पर धरना देने वाला अन्ना और कनिया अब भले ही इनका साथ न दे लेकिन भारत का आम आदमी इन योद्धाओं के साथ है .भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई अब दिल्ली ही नहीं देश के गली कूचों तक लड़ी जायेगी और ये लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक स्वयं को भारत का भाग्य विधाता समझने वाले ये काले चोर जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा दिए जाते हैं .

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें