बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

हम भगीरथ थे कभी आज हैं दशरथ माँझी

मौजे दरिया हैं हम दरिया पे रवानी होगी
राह रोकेगी जो चट्टान हटानी होगी  .

रोज चट्टान यहाँ कौन खड़ी करता है ?
सबसे पहले तो यही खोज करानी होगी .

हम भगीरथ थे कभी आज हैं दशरथ माँझी
बोल चट्टान !  क्या ये बात बतानी होगी  ?

अब जटाओं को महादेव! खोल दो अपनी
तुमने रोकी है जो गंगा वो बहानी होगी .



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