शनिवार, 19 मार्च 2016

राष्ट्रभक्ति का राग ना गाओ

राष्ट्रभक्ति का राग ना गाओ राष्ट्र पिता के हत्यारो अंग्रेजो के तलवा चाटू, भारत माँ के गद्दारो हमने अपने वतन की खातिर लहू दिया है,लाल दिये कफन खसौटों मुल्क में तुम तो बनकर सिर्फ दलाल जिए.
राष्ट्रभक्ति की बात तुम्हारे मुख से भली नहीं लगती जन्में जहॉं शहीद नागपुर में वो गली नहीं मिलती . हमको तो लाहौर, कराची, पेशावर ही दिखता है कलकत्ते में उठा शीश भी साबरमती में झुकता है .
श्रीनगर से अन्डमान तक औ इम्फाल पहाडी पे अपना नाम लिखा पाआगे तुम बंगाल की खाडी पे.. लेकिन किसी जगह तुम अपना नाम नहीं दिखला सकते कफन दलाली खाने वालो सच को ना झुठला सकते.

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