मंगलवार, 29 मार्च 2016


हम ने बहुत से जार, कर बेजार छोड़े हैं
हम ने अनेकों हिटलरों के दाँत तोड़े हैं
हम शाहों को मिट्टी चटाती लोकशाही हैं
हम लाल झण्डे के सिपाही हैं ...
यह धार हँसिए की हमे बढ़ना सिखाती है
हम को हथौड़े की पकड़ बढ़ना सिखाती है
हम हर अंधेरे के मुकाबिल कार्यवाही हैं
हम लाल झण्डे के सिपाही हैं ...
हम झुक नहीं सकते किसी तूफान के आगे
हम रुक नहीं सकते किसी चट्टान के आगे
कुर्बानियों की राह के जाँबाज राही हैं
हम लाल झण्डे के सिपाही हैं ...
हम को नहीं स्वीकार ये धोखे की तकरीरें
हम को नहीं मंजूर ये पाँवों की जंजीरें
हम लूट के ज़ालिम ठिकानों की तबाही हैं
हम लाल झण्डे के सिपाही हैं ...
- महेंद्र नेह

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