सोमवार, 7 मार्च 2016

चादर ताने सोने वालो

दुश्मन ड्यौढ़ी पर आ पहुँचा चादर ताने सोने वालो
अब वक्त नहीं है सोने का, पीछे जगकर रोने वालो .
आलस्य त्याग कर उठ बैठो लो हाथ खड़े कर अंगड़ाई
देखो किसने बेड़ी बाँधी, किसने हथकड़ियाँ पहनाई .
किसने बच्चों को रोका है हँसने से और मुस्काने  से
कोयल को अपनी बगिया में डाली पर बैठे गाने से .
ये गिद्ध,भेड़िये शव भक्षी इसलिए यहाँ मंडराते हैं
हम मरणासन्न पड़े रहते, ना उठ कर के धमकाते हैं .
इसका परिणाम हुआ है ये, बढ़ गया हौसला कितना है
वो भी हमलावर बन झपटा जिसका कद चूहे जितना है.
बच्चों को धमकाने वाले इन शैतानों को समझा दो ---
'अच्छे दिन अगर तुम्हारे हैं अपने आका को बतला दो
जो बुरी नजर से देखेगा वो आँख फोड़ दी जायेगी
जो हाथ उठाये बच्चों पर वो बाँह तोड़ दी जायेगी
खामोश नहीं बैठेंगें हम, लड़ते लड़ते मर जायेंगें
सौ बार चढ़ाना फाँसी तुम सौ बार खड़े हम पायेंगे .


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