बुधवार, 9 मार्च 2016

मनु स्मृति दहन



   आप भी मनुस्मृति जला रहे हैं ! वही मनुस्मृति जिसमें हिन्दू धर्म के चातुर्य व्र्ण की का स्वरूप ,अधिकार और दायित्व वर्णित किया गया है और जिसका हवाला देकर आप हजारों बरसों से समाज को उॅंच नीच में विभाजित किये हो. लेकिन एक मनुस्मृति जलाने से क्या होगा? किस किस को जलाआगे बाकि साहित्य और धर्म ग्रंथों में भी तो यही विष व्याप्त है.जलाना तो किसी समस्या का हल नहीं है.
क्या कहा 'हमने मनुस्मृति जलायी तो क्या हो गया आपको तो खुश होना चाहिए. आप भी तो मनुस्मृति जलाने के समर्थक रहे हैं. अम्बेडकरवादियों ने मनुस्मृति का दहन किया तो क्या वामपथियों ने समर्थन नहीं किया है?'
पता नही वो कौन से वामपंथी हैं जो ऐसे किसी भी कृत्य का समर्थन करते हैं. मुझे तो यह किसी भी तरह अच्छा नहीं लग रहा है. मेरी नजर में ये कुछ कुछ वैसा ही है जैसे मध्यकाल में नालंदा या अलेक्जन्ड्रिया के पुस्तकालयों को हमलावरों द्वारा का जलाया जाना. अंतर बस इतना है तब तलवार के जोर पे मुल्क जीते जाते थे और पराजित लोगों के मनोबल को तोड़ने के लिए हर उस चीज को नष्ट भ्रष्ट कर दिया जाता था जिस में उनकी श्रद्धा और निष्ठा होती थी.पुस्तक जलाने वालों ,कार्टून के लिए सर कलम करने वालों की मानसिकता उन्हीं हमलावारों की परम्परा का अवशेष मालूम होती है.
सही कहूॅं तो किसी भी किताब को जलाने का काम कोई पढ़ा लिखा आदमी कर ही नहीं सकता है ये काम अनपढ़ और जाहिल इन्सानों का ही हो सकता है. पुस्तकें अपने काल का आईना होती हैं. उसमें उस वक्त के बुद्धिमान लोगों की सोच अंकित होती है .उसमें अंकित विचार अपने वक्त की जरूरतों या बौद्धिक विकास के अनुरूप होते हैं .विचार वक्त के अनुरूप अबदलते ही हैं. तब नए रचनाकार अपने वक्त की जरूरतों के हिसाब से नए कायदे कानून और आदर्श बनाते हैं . यही सत्य है .शाश्वत सत्य जैसी कोई चीज नहीं होती है .इसलिए ये कहना की जो उन किताबों में लिखा गया है वो सब गलत है कुछ ठीक नहीं होगा. ये माना कि बहुत कुछ ऐसा है जो प्रांसगिक नहीं है लेकिन ये किसने कहा है कि जो अप्रासंगिक है उसे माना ही जाए ? और वह माना भी कहाँ जाता है ? इसलिए अच्छा यही होगा कि जो पुरानी किताबों में लिखा है उसे तत्कालीन समाज की अवस्था के अध्ययन के लिए सहेज कर रखा जाए और नए समाज के निर्माण के लिए नए जीवन मूल्यों के अनुरूप नयी रचनाएँ की जाएँ .
हमें विंध्वश नहीं सृजन करना है .नव निर्माण के लिए पुराने का गिराना हमेश जरुरी नहीं होता है ,कुछ चीजें पुरातत्व महत्व की भी होती हैं जिन्हें सरंक्षित रखना हमारा ही दायित्व है. वैसे भी किसी लकीर को बिना मिटाये छोटा करने का सर्वोत्तम तरीका उससे बड़ी लकीर खींचना है .इसलिए आईये हम मिटायें नहीं, जलाएं नहीं कुछ बड़ा कर दिखाएँ .

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