मंगलवार, 12 जुलाई 2016

कुछ तुलसी सूर कबीर भी हैं 
कुछ फैज मजाज मीर भी हैं 
कुछ अदम गोंडवी से शायर                                                                                     कुछ दुष्यंत कुछ बलबीर भी हैं .


नए जमाने की है कहानी, मुझे भी तुमको है ये सुनानी 
इसे न कोई कहीं लिखेगा,कहेगा कोई न इसके मानी 
जिसे भी देखोगे गौर से तुम, अतीत उसका यही मिलेगा 
वो एक जमाने का है खलनायक अभी जो नायक तुम्हें दिखेगा . 


जो जरूरी काम है, पहले वो निपटा लीजिए
बाद में मरना पिताजी पहले दस्तखत कीजिये 
ऐसा कह के पुत्र ने वसीयत के कागज़ रख दिए 
दस्तखत के बाद बोला फीस भी तो दीजिये .  




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