शनिवार, 16 जुलाई 2016

'समझदारों का शोक गीत'




इक घटना के घट जाने से
कुछ कुत्तों के मर जाने से 
भौं भौं नहीं किया करते हैं 
बस चुपचाप जिया करते हैं . 

समझदार हो तो चुप बैठो 
ज्यादा आँख निकाल न ऐंठो 
आँख में छर्रा लग जाएगा 
बेटा लेटा थर्रायेगा .  

लब चुपचाप सिया करते हैं  
बस चुपचाप जिया करते हैं . 


पत्थर पर मत करो भरोसा
वो कब हुआ बुलेट के जैसा  
गोली राष्ट्रवाद की खाओ 
बिना स्वाद के गाल बजाओ  

नम ना आँख किया करते हैं  
बस चुपचाप जिया करते हैं . 


चिल्लाने से भी क्या होगा ?
रचा राम ने जो वो होगा .
यही तुम्हें समझाते आये 
सीधी राह दिखाते आये .

पंगा नहीं लिया करते हैं 
बस चुपचाप जिया करते हैं . 


समझदार इंसान वही हैं  
जबरा मारे कहें, सही है  
सही गलत समझे न देखें  
माने सभी भाग्य के लेखें.


अपना काम किया करते हैं. 
बस चुपचाप जिया करते हैं . 


जिस तिस के मरने पर रोना 
बिना बात आपा यूँ खोना 
पागलपन की बड़ी निशानी 
रोयेगी माँ, दादी, नानी .

चादर तान लिया करते हैं 
बस चुपचाप जिया करते हैं . 


जो रोयेगा,चिल्लायेगा
यूँ ही वो मारा जायेगा 
देश भक्त बन गए कसाई 
उनके माँ ना बहिन ना भाई 

सबका खून पिया करते हैं 
बस चुपचाप जिया करते हैं . 


मर जाओ ऐसे जीने से 
सारा गम रखकर सीने पे 
क्या अफ़सोस किया करते हो ?
क्यों डरपोक रहा करते हो ?


मुँह को तोड़ दिया करते हैं 
ना चुपचाप जिया करते हैं .



  







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