मंगलवार, 19 जुलाई 2016

यूँ दीवाल सजाओ सारी

सुबह उठो दी वाल को अपनी झाड़ो,पोंछो और सजाओ 
शुभ सन्देश लिखो जीवन के, हँसी ख़ुशी के गीत सुनाओ  

एक मरा, दो घायल, लुट गये कई राह में आते जाते 
ये अखबार लिखा करता है,पढ़कर दादा जिसे सुनाते 

मीत लिखो नित तुम तो ऐसा, हर्षित मन जिससे हो जाये 
पढ़कर बैठे हँसे अकेले या उठ नाच नाच कर गायें .  

ऊबे थके पिटे जीवन में कुछ उल्लास,उमंग कुछ भर दो 
ये सूना आकाश हुआ है इंद्र धनुष के सब रंग भर दो .

जैसे सांझी रची किसी ने,यूँ दीवाल सजाओ सारी
जाने अनजाने सब देखें और सराहें कर के यारी .  


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