सोमवार, 12 सितंबर 2016

ऐलन


पहले विश्व युद्ध में ब्रिटेन और फ़्रांस ने मिलकर जर्मनी को तगड़ा वाला गिराया था. ये वो दौर था जब जर्मनी में हिटलर जवान हुआ था. और पूरे जर्मनी में उसका बोलबाला होने वाला था. दूसरे वर्ल्ड-वॉर की तैयारी चल रही थी. जर्मनी ने तय किया था, इस बार किसी भी कीमत पर हारेंगे नहीं. और नए-नए हथियारों के साथ उन्होंने एक ऐसी मशीन बनाई जिसे एनिग्मा मशीन कहते थे. ये मशीन एक तगड़े कम्युनिकेशन के लिए बनाई गई थी. जिससे सेना और सरकार के बीच भेजे गए संदेश बिना इधर-उधर हुए जल्दी पहुंच जाएं. इस मशीन के दम पर जर्मनी दुनिया जीतने के ख्वाब देख रहा था.

लेकिन ब्रिटेन में एक लड़का था. ब्रिटिश सरकार के लिए कोड ब्रेकिंग का काम करता था. उसने एनिग्मा मशीन का कोड तोड़ दिया, एक बॉम्ब नाम की मशीन बनाकर. ऐलन का ये योगदान न सिर्फ ब्रिटेन को जीत के करीब ले गया, बल्कि दूसरे विश्व युद्ध को 4 साल छोटा कर दिया. जानें कितनी जानें जाने से बच गईं. इसके अलावा एक चीज और हुई. एनिग्मा मशीन के लिए किए गए काम ने दिया दुनिया को उसका पहला कंप्यूटर.

बॉम्ब मशीन 
बॉम्ब मशीन
देश और दुनिया के लिए 3 बड़ी चीजें करने के बाद भी ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ ने ऐलन को जेल भेजने के निर्देश दे दिए. क्योंकि ऐलन ट्योरिंग गे थे. ऐलन ने बोला मैं जेल नहीं जाना चाहता. तो उनके गुप्तांग काट उनको देश-निकाला दे दिया गया.
ऐलन ये बर्दाश्त नहीं कर पाए. देश से निकाले जाने के दो साल बाद उन्होंने एक सेब में साइनाइड लगा कर खा लिया. और इस तरह अपनी जान ले ली. मौत के समय ऐलन की उम्र महज़ 41 साल थी.

ये कंप्यूटर जीनियस भारत में पैदा हो सकता था

इनके पिता इंडियन सिविल सर्विस में अफसर थे. उस वक़्त बिहार और उड़ीसा प्रांत के छतरपुर में पोस्टिंग थी. इनके नाना मद्रास रेलवे में इंजिनियर थे. ऐलन के मम्मी-पापा ने तय किया कि उनका बेबी लंदन में पैदा होगा. इसलिए उनके पिता ने इंडिया में अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली. और ऐलन के लिए दोनों ट्रेवल कर लंदन पहुंचे. जहां ऐलन पैदा हुए.

आसान नहीं था सपने देख पाना

ऐलन को गणित से प्यार था. लेकिन उस वक़्त स्कूलों में साइंस पढ़ना खराब माना जाता था. ऐलन का साइंस पढ़ना उनकी मां को शर्मिंदा करता था. एक अंग्रेज़ जेंटलमैन बनने के लिए भाषा और अंग्रेज ग्रंथों की पढ़ाई को जरूरी माना जाता था. ऐलन की भाषा कमज़ोर थी. अंग्रेजी टीचर उनसे परेशान रहते थे. ये मां के लिए हमेशा परेशानी और शर्मिंदगी का कारण था.

ंसंद 4 लमंते
4 साल की उम्र में
लोग बताते हैं ऐलन थोड़ा हकलाते थे. कई बार बोलने में अटकते. और बोलते समय सही शब्द नहीं आते थे. इसी के चलते उनका इंटरव्यू करने वाले पत्रकार अक्सर अपना धीरज खो बैठते थे.

ऐलन का पहनावा फॉर्मल नहीं था. जब हर लड़के से उम्मीद की जाती थी कि वो जेंटलमैन बने, ऐलन बिखरे बाल, बढ़े हुए नाखून और बिना टाई के रहते. उनका चहरा इतना जवान था कि 30 की उम्र में भी लोग उन्हें अंडरग्रेजुएट समझते थे.

ओलिंपिक-स्तर के एथलीट जैसे थे

दौड़ने का खूब शौक था. जिन दो जगहों पर वो काम करते थे, उनके बीच 10 मील का फासला था. जिसे तय करने के लिए उनके साथी पब्लिक ट्रांसपोर्ट लिया करते. जबकि वो पूरा रास्ता दौड़कर ही तय कर लेते थे. उन्होंने एक मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया था, जिसमें इनका रनिंग टाइम 2 घंटे 46 मिनट 30 सेकंड था. ये ओलिंपिक के मैडल विजेता से बस 11 मिनट कम था. लोग पूछते कि इतना क्यों दौड़ते हो. तो कहते, मुझे नौकरी से इतना स्ट्रेस हो जाता है कि दौड़ने के अलावा उसे अपने दिमाग से निकालने का कोई चारा नहीं है.

तनददपदह

सुसाइड नहीं, इसे मर्डर कहते हैं

40 साल की उम्र में ऐलन को आर्नल्ड नाम के, 19 साल के लड़के से प्यार हो गया. दोनों की मुलाकात सिनेमा के बाद हुई. ऐलन ने आर्नल्ड को लंच पर बुलाया. और इस तरह दोनों का रिश्ता शुरू हुआ. लेकिन कुछ दिनों बाद ऐलन के घर चोरी हुई. और आर्नल्ड ने बताया कि वो चोर को जानता है. ऐलन ने पुलिस से शिकायत की. जांच शुरू हुई. और जांच के दौरान ऐलन ने ये माना कि वो आर्नल्ड के साथ रिलेशनशिप में है.

अब केस ऐलन और आर्नल्ड पर चला. ऐलन को दोषी पाया गया. कोर्ट ने दो विकल्प दिए. या देश छोड़ दो. या अपने सेक्शुअल पार्ट्स कटवा लो. ऐलन ने मौत के ऊपर अपनी सेक्स लाइफ ख़त्म करना चुना. लेकिन ब्रिटेन ने अगले एक साल तक उनके हॉर्माेन का ट्रीटमेंट किया. उनके ‘पुरुषत्व’ को सरकार के निर्देशों से ख़त्म किया. उनके शरीर में वो हॉर्माेन डाले गए, जिससे सेक्स चेंज हो जाता है. ऐलन अपने आखिरी दिन एक ऐसे समाज में गुजार रहे थे, जिसमें लोगों को गे और ट्रांसजेंडर के बीच का फर्क नहीं मालूम था. ये ऐसा समाज था जिसमें आपकी सारी क्षमताओं को केवल इसलिए नजरअंदाज कर दिया जाता है, कि आप किसी के साथ सोने के पहले दुनिया से इजाज़त नहीं मांगी.

इस ट्रीटमेंट ने ऐलन को वो बना दिया, जिसे आम भाषा में लोग ‘नपुंसक’ कहते हैं. इसके अलावा औरतों के हॉर्माेन बढ़ाने से ऐलन के स्तन बढ़ गए थे.

ऐलन दुनिया से अलग होते गए. लेकिन काम करना नहीं छोड़ा. हर दिन पूरी ताकत से खुद को समझाते कि कुछ नहीं बदला है. लेकिन एक समय ऐसा भी आया कि ऐलन का धीरज जवाब देने लगा. और उन्होंने जहर खा लिया.

साल 2009 में एक सिग्नेचर कैंपेन के बाद ब्रिटिश सरकार ने माना कि ऐलन को दी गई सजा गलत थी. प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने माफ़ी मांगी. लेकिन दुनिया का एक जीनियस तो खो चुका था. ये दुर्भाग्यपूर्ण दिन आज का ही था.

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