शनिवार, 24 सितंबर 2016


जिनका अपना मन न भरता अपनी ही तस्वीरों से 
राम बचाये हम को ऐसी हीरोइन औ हीरों से .

जिन की कमर कमर न हो कर एक बड़ा सा कमरा है      
उन को भी ये खब्त हुआ है नाप करेंगे जीरों से .  



ये असुर ये राक्षस ये दैत्य फिर से बढ़ रहे हैं.
राम शर को तान लो अब ये अजुध्या चढ़ रहे. 


माँगते हैं देश अपना वेश अपना माँगते हैं 
तुम जो लाये साथ उससे शेष अपना मानते हैं.


मन्त्र बल कोई तुम्हारा अब असर कर ता नहीं है 
जिसका जो हक़ है उसे दो और कुछ रस्ता नहीं है .





जब हथियारों के सौदागर अपने अस्त्र परखने निकले 
जद में किसका घर आ जाए खतरा चारों ओर बड़ा है .


बस्ती के टूटे घरवालों हिम्मत हार नहीं जाना तुम 
ये अदना मजदूर तुम्हारे हर संकट में साथ खड़ा है .

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