रविवार, 11 सितंबर 2016

JNU में फिर लाल सलाम

jnu-2'हम और लड़ेंगे जीतेगें संघर्ष नहीं अब कम होगा
जब तक आजादी में सबका हिस्सा न बिलकुल सम होगा .'

JNU में फिर लाल सलाम, लेफ्ट गठबंधन का कब्जा

September 11, 2016 12:49 am by: haryanakhas Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-


शुक्रवार को जेएनयू में हुए छात्रसंघ के चुनावों का परिणाम घोषित हो चुका है। बता दें कि इन चुनावों में सेंट्रल पैनल की चारों सीटों पर एसएफआई और एआईएसए का कब्जा रहा है। एआईएसए के मोहित पांडे ने अध्यक्ष पर जीत दर्ज की है तो वहीं अमल पीपी इसके उपाध्यक्ष होंगे। वहीं शतरूपा चक्रवर्ती महासचिव एवं तबरेज हसन संयुक्त सचिव होंगे।


कन्हैया का कार्यकाल समाप्त

वहीं इन चुनावों के साथ-साथ छात्रसंघ अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार का कार्यकाल भी पूरा हो गया, जो कि 9 फरवरी को जेएनयू में हुई घटना के बाद काफी चर्चा में रहे। वहीं शुक्रवार को अपने कार्यकाल पूरा होने के बाद कन्हैया ने सोशल मीडिया पर एक पत्रनुमा पोस्ट भी डाली जिसमें उन्होनें अपने समय के तमाम छात्रों, शुभचिंतकों और शिक्षकों को शुक्रिया कहा है।

क्या लिखा कन्हैया ने अपनी पोस्ट में

साथियों,

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी से मुक्त होने के मौके पर अपने लोगों को शुक्रिया कहना बड़ा अजीब लग रहा है लेकिन पता नहीं क्यों बार-बार उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का मन कर रहा है जो संघर्ष के हर मुकाम पर किसी न किसी रूप में मेरे साथ खड़े रहे। जेएनयू के विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, पूर्व विद्यार्थियों और कैंपस के बाहर के तमाम शुभचिंतकों का शुक्रिया जो समाज में समानता, न्याय व लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए समाज को पीछे धकेलने वाली ताकतों के विरुद्ध जेएनयू छात्रसंघ के संघर्ष #StandWithJNU में शामिल हुए। जेएनयू और इसके छात्रसंघ को बदनाम और बर्बाद करने की हरसंभव कोशिश के दौर में आप जैसे साथियों ने उन्हें यह बता दिया कि जेएनयू जिस जनवादी सोच के साथ हमेशा से खड़ा रहता आया है उसकी ताकत तमाम दंगाइयों और षड्यंत्रकारियों की ताकत से कई गुना ज़्यादा है।

मुझे याद आ रहा है कि छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद मैंने विक्ट्री मार्च (विजय जुलूस) नहीं बल्कि यूनिटी मार्च निकाला था, क्योंकि मैं और मेरा संगठन हमेशा ही यूनिटी के पक्ष में खड़े हुए हैं, और मेरे पूरे कार्यकाल में मुझे उन तमाम लोगों का सहयोग मिला जो कई मसलों पर मुझसे वैचारिक तौर पर असहमत हैं। मेरे कार्यकाल में सबसे पहला विरोध प्रदर्शन एफ़टीआईआई के संघर्षरत साथियों के समर्थन में हुआ था और पूरे साल देश के तमाम कैंपसों में सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों के विरुद्ध उठ रही आवाज़ों के पक्ष में जेएनयू छात्रसंघ ने अपनी आवाज़ बुलंद की और 9 फरवरी के बाद इन सभी कैंपसों में #StandWithJNU की आवाज़ गूँजी। चाहे छात्रवृत्ति को बचाने के लिए ऑक्यूपाई यूजीसी का आंदोलन हो या रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के दोषियों को सज़ा दिलाने का संघर्ष, या दादरी और ऊना में हुए अत्याचार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन, हर मौके पर आप सभी लोगों का जो सहयोग मिला उसके लिए शुक्रिया। हम जिशा और डेल्टा को न्याय दिलाने के लिए भी लड़े और आंबेडकर भवन को गिराने की साज़िशों के ख़िलाफ़ भी। कैंपस में लाइब्रेरी में बेहतर सुविधाओं के लिए भी संघर्ष किया और बलात्कारी छात्र को सजा दिलवाने के लिए भी।

जिन लोगो ने मुझे वोट देकर इस पद के काबिल समझा, उन सबका शुक्रिया। तहे दिल से उन लोगों का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जिन्होंने मुझे वोट नहीं दिया और शायद वे मेरी राजनीतिक विचारधारा से पूरी तरह सहमत भी नहीं थे, लेकिन जो मेरी बोलने की आज़ादी के समर्थन में बहुत बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। मैं जानता हूँ कि वे कन्हैया कुमार के लिए नहीं बल्कि अपने निर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष के लिए सड़कों पर उतरे थे। शुक्रिया उन सभी शिक्षकों का जो तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए जेएनयू छात्रसंघ के साथ खड़े रहे, जिन्होंने कहा कि “कन्हैया जब पुलिस रिमांड से अदालत में आएगा तो वहाँ उसे सबसे पहले अपने समर्थन में खड़े शिक्षकों के चेहरे दिखेंगे” और संघर्ष के हर मोड़ पर उन्होंने हर तरह की मदद इस आंदोलन में की। उन सभी कर्मचारियों को भी मेरा आभार जो हमारे इस संघर्ष में शामिल हुए ।

शुक्रिया उन सभी लोगों का जिन्होंने मेरे समर्थन में लेख और फ़ेसबुक पोस्ट लिखे और जिनके लिए ना जाने कितनी गालियाँ उन्हें मुझे देशद्रोही समझने वाले और संघी मानसिकता वाले लोगों से खानी पड़ी; जो मेरे और अन्य साथियों के संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में अपने घरवालों, मित्रों और देश के अन्य नागरिकों से तार्किक बहस करने में कभी पीछे नहीं रहे। आप हैं तो लोकतंत्र है। आज़ादी चौक पर हर दिन बड़ी संख्या में पहुँचकर प्रशासन के अन्याय के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले साथियों का भी आभारी हूँ। जेएनयू का पक्ष लोगों के सामने रखने के लिए की गई देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राओ में जिन लोगों ने हौसला बढ़ाया उनका भी शुक्रिया। मुझे इस बात का अहसास है कि मैं चुनाव से पहले आप लोगों से किए गए अपने कई वादे पूरे नहीं कर पाया, लेकिन जेएनयू पर इस तरह के अप्रत्याशित हमले के दौर में और मौजूदा राजनीतिक हालात में अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने का हरसंभव प्रयास मैंने किया है। मुझे याद आता है कि जेल से लौटकर आने के बाद आपको संबोधित करते हुए जब मैंने पहला शब्द कहा – ‘साथियों’ और जिस उत्साह के साथ आप सबने मेरा हौसला बढ़ाया, यह उत्साह और समर्थन ही पूरे संघर्ष के दौरान मेरी ऊर्जा बना रहा।

पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था पर जिस तरह का हमला सरकार और नवउदारवादी ताकतें कर रही हैं, समाज के वंचित वर्गों, दलितों, महिलाओं, पिछडों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जिस तरह से बढ़ा है, मुझे उम्मीद है कि नई चुनकर आने वाली यूनियन उसके विरुद्ध संघर्ष की मशाल को बुझने नहीं देगी। कैंपस में छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए की गई कोशिशों को आगे ले जाया जाएगा और बेहतर सुविधाओं और छात्रवृत्ति के लिए संघर्ष को जारी रखा जाएगा। मैं जेएनयू की जनवादी सोच के पक्ष में हमेशा खड़ा रहूँगा। रोहित एक्ट को लागू करने की लड़ाई हो या कैंपस लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए लिंगदोह सिफ़ारिशों के विरुद्ध संघर्ष; समाज में वंचित लोगो के हक को सुनिश्चित करने की लड़ाई हो या सांप्रदायिक फासीवादी ताकतों के विरुद्ध और श्रम की लूट के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने के प्रयास; सबको शिक्षा, सबको काम सुनिश्चित करने के लिए और समाज में समानता व न्याय स्थापित करने के संघर्ष के हर मोर्चे पर आप मुझे अपने साथ पाएँगे, यह मेरा वादा है।

कन्हैया कुमार,

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष (2015-16)

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Friends and Comrades!

My tenure as JNUSU President is over now. Though it feels quite strange to say thanks to the people whom you believe to be yours, yet I constantly feel like expressing my gratitude to all those people who stood with us at every step of our struggle in every way possible. I express my gratefulness to the students, teachers, workers and alumni of JNU and all the other people from outside the campus who stood for ensuring equality, justice and democracy against the dogmatic forces which attempted to pull the society towards backwardness; during the #StandWithJNU movement led by JNUSU. During this entire period when all sorts of efforts were made to malign and destroy the image and spirit of JNU and JNUSU, all of you together made sure to prove again that the strength of people-oriented ideology which JNU supports since its origin, is much more powerful than the onslaughts of these rioters and conspirators.

I can recall that after winning the mandate of JNU students as their President, I gave a call for a ‘Unity March’ instead of a ‘Victory March’ because both my org

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