रविवार, 30 अप्रैल 2017

शक्ल सूरत बुरी नहीं अपनी
जिन्दगी क्यूँ हराम होती है

कोई हमको भी चाहता होता
उम्र यूँ ही तमाम होती है .

रात भर ख्वाब देखते रहते
ख्वाहिशें फूट फूट रोती हैं .

ये सफ़र क्यूँ ना कहीं थमता है ?
सुबह होती है, शाम होती है .

अपनी आँखों में छुपा ले मुझको
मुझको आंसू ना समझ मोती हैं .


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